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अब जिला अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग वार्ड, 2 माह में तैयार होगा भवन

3 वर्ष पहले
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शासकीय जिला अस्पताल की बहुप्रतिक्षित एमसीएच यूनिट जुलाई तक शुरू हो जाएगी। अस्पताल के पीछे बन रही इसकी इमारत का कार्य अंतिम चरण में है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए 100 बेड के इस मातृ शिशु अस्पताल में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं एक छत के नीचे उपलब्ध रहेंगी। यही नहीं अस्पताल परिसर में वयोवृद्ध जनों के इलाज के लिए एक अलग वार्ड भी बनाया जा रहा है।

आने वाले दिनों में अस्पताल का बाल एवं शिशु तथा स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग पूरा का पूरा इसी इमारत में शिफ्ट कर दिया जाएगा। यहां तैनात डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ को सिर्फ प्रसूतियों व नवजात शिशुओं की देखभाल करनी होगी। केंद्रीय सरकार के दिशा निर्देशन में तैयार की गई इस इमारत में हाल-फिलहाल हर वह इंतजाम हैं, जिससे हर प्रसव सुरक्षित प्रसव होगा।

एसएनसीयू, एनआईसीयू के साथ पीआईसीयू भी: कम समय में पैदा हो जाने वाले बच्चों का इलाज हो या पैदा होते ही बीमारी के चपेट में आ जाने वालों का इलाज या फिर एक माह से ऊपर के बच्चों का इलाज। सबका इलाज एमसीएच यूनिट रन होते ही एक छत के नीचे होगा। गंभीर से गंभीर बच्चों के इलाज की सभी सुविधा व मशीनरी मातृ शिशु अस्पताल में इंस्टाल कर दी गई है।

जिला अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग वार्ड बनाया जा रहा है। जल्द ही काम होगा पूरा।

सरकार अलग से पद दंे तो और बेहतर होगी तस्वीर

100 बेड के मातृ शिशु अस्पताल को लेकर भी ऐसा ही हुआ है। इमारत बनाकर मशीनरी दे दी गई है, उसे संचालित करना, सिविल सर्जन की जिम्मेदारी है। सिविल सर्जन डॉ केके जैन ने शिशु तथा स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग शिफ्ट करने का फैसला किया है।

सिर्फ लिफ्ट का काम ही बचा

अस्पताल में लिफ्ट का कार्य रह गया है। गेट लगाना व पोर्च का चल रहा है। इसमें दो माह लगेगा। जुलाई के पहले में काम पूरा हो जाएगा। डॉ. केके जैन, सिविल सर्जन, दुर्ग

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