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म्यूजिक, पेंटिंग और केलीग्राफी सीख रहे ध्यान केंद्रित करने में मिल रही सहायता

3 वर्ष पहले
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रिसाली गर्वमेंट स्कूल में म्युजिक के साथ प्रशिक्षणार्थियों को पेंटिंग, केलीग्राफी, थर्मोकोल आर्ट, मूर्ति बनाना, स्पोकन इंग्लिश, सिंगिंग, योग और डांस आदि सिखाया जा रहा है। योग आसन के साथ हारमोनियम और तबला बजाना भी बताया जा रहा है। इसमें पांच साल के बच्चे से लेकर 65 साल के बुजुर्ग शामिल हो रहे हैं। एक्सपर्ट मॉडर्न आर्ट स्पेशलिस्ट डीएस विद्यार्थी का कहना है कि प्रशिक्षण में आने वाले बच्चों के अक्षर सुधर रहे हैं और उनका ध्यान भी नहीं भटक रहा है।

महिला एवं बालिका मंडल युवा स्वर्णकार संघ भिलाई-दुर्ग के बैनर तले चल रहे समर कैंप में बच्चों को उनके इंट्रेस्ट के अनुसार ट्रेनिंग दी जा रही है। डीएस विद्यार्थी, मूर्तिकार अंकुश देवांगन, बीएल सोनी, रूपा साहू, सतीश सोनी, शशिप्रिया, कृष्णा जे चौधरी, प्रिया, नरेंद्र पाल, सुगम शिवालय, राजा, रामचंद्र सर्पे आदि नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं।

रिसाली स्कूल में बच्चों और बड़ों को सभी के लिए लगाया गया है ग्रीष्मकालीन शिविर।

हारमोनिमय और तबला के साथ सीख रहे हैं सरगम

बच्चों को हारमोनियम और तबला बजाना भी सिखाया जा रहा है। इसके लिए उन्हें पहले सरगम और सात स्वरों के बारे में बताया जा रहा है। इसमें स्वर लहरियों के बीच संतुलन करना और रागों को समझा रहे हैं। साथ में तबला बजाना भी सीख रहे हैं।

छोटे बच्चे मिट्‌टी से बना रहे हैं मुखौटे व देवताओं की मूर्तियां

प्रशिक्षण लेने के लिए आ रहे बच्चों को मूर्ति कला की बारीकियां भी बताई जा रही है। मिट्टी की पहचान, कंकड़ अलग करना, उसे भिगोकर रूई मिलाना, फिर उससे देवताओं की मूर्तियां बनाना या फिर किसी सांचे में डालकर मुखौटा बनाना बता रहे हैं।

डांस की लगी क्लास

शिविर में कत्थक नृत्यांगना प्रिया श्रीवास्तव क्लासिकल डांस के बारे में बता रही हैं। बच्चों को डांस की शुरुआत में नमस्कार करना, फिर गणपति वंदना से विभिन्न स्वर लहरियों के साथ चेहरे और शरीर से विभिन्न भाव मुद्राओं को प्रदर्शित करना बता रही हैं।

यंत्रों की महत्ता बताई

शिविर में अंचल के कलाकार रिखी क्षत्रीय की बेटी शशिप्रिया अपने पिता के साथ चित्र कला के साथ साथ अंचल के पुराने और लुप्त हो रहे वाद्य यंत्रों के बारे में भी जानकारी दे रही हैं। उसे बजाने की कला भी भी सीखा रहे हैं।

अक्षर भी बना रहे

यहां आए कई बच्चों के अक्षर ठीक नहीं हैं। उन्हें केलीग्राफी से अक्षर सुधारना और ध्यान से लिखना बता रहा हैं। इससे उनका ध्यान केंद्रित हो रहा है। पढ़ने योग्य अक्षर लिखने में सफल हो रहे हैं। अंचल के कलाकार नई पीढ़ियों को गढ़ रहे हैं।

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