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एक माह के रोजे से पाचन तंत्र होता है मजबूत, सब्र सिखाता रमजान: मो. समीर

3 वर्ष पहले
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करीब 30 साल बाद मई माह में रमजान आया है। पारा 44 डिग्री के आस-पास है और दिन लंबे होने से रोजे की अवधि भी करीब 14 घंटे से अधिक की रहेगी। अधिकांश रोजे इसी अवधि में आएंगे। हालांकि मुस्लिम समुदाय के लोगों में इसे लेकर चिंता नहीं है। रमजान में सुबह सेहरी का वक्त 04.05 मिनट व इफ्तार का वक्त शाम को 6.41 मिनट के आस-पास का है।

बताया जा रहा है कि गर्मी में रोजे करने पर कई सारी सावधानियां रखनी होती है। गर्मी में सेहरी और इफ्तार में खानपान में सावधानियां रखनी होगी। इसके तहत सेहरी के समय हल्का खाना लें, दही या छाछ, रायते, नींबू पानी का सेवन जरूर करे। जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है वह एक गिलास ग्लूकोज लें। तली हुई चीजों से बचें। ओआरएस का घोल भी ले। इसी तरह इफ्तार के समय खजूर और फल से रोजा इफ्तार करे। इफ्तार के एक से डेढ़ घंटे बाद खाना खाएं। रोजेदार बच्चों का भी खान-पान में ध्यान रखा जाए।

गर्मी में सेहरी और इफ्तार में खानपान में सावधानियां रखनी होती है

शाम की नमाज के बाद रोजेदारों ने एक ही स्थान पर बैठकर खजूर खाकर इफ्तार किया।

वर्ष 2019 में भी मई में ही आएगा रमजान

रमजान का मुबारक महीना 2019 में मई के शुरु सप्ताह के दिनों में ही शुरु हो जाएगा। उसके बाद 2020 में अप्रैल माह में रोजे रखे जाएंगे। अप्रैल माह में गर्मी कम पड़ने से रोजेदारों को रोजा रखने में राहत मिल सकेगी। शहर में रमजान की रौनक छा गई। चौथे रमजान पर लोगों में उत्साह नजर आया।

विशेष परिस्थितियों में जीना सिखाता है रमजान

रमजान को इबादत का महीना करार दिया गया है। इस माह की हर इबादत को 70 दरजा सवाब हासिल है अर्थात इसमें किए गए पुण्यों व इबादत का फल 70 गुना अधिक मिलता है। यह माह इंसानियत के लिए पैगाम है। अपनी ख्वाहिशों को कम करते रखते हुए जकात का एक तरीका हुजूर की सुन्नतों की पैरवी करता है। रोजा सब्र का पाठ भी पढ़ाता है। रमजान रूपी प्रशिक्षण काल में उन चीजों से दूर रहकर उन्हें हमेशा के लिए छोड़ना आसान हो जाता है, जिनके हम आदी हो गए है। रमजान में रोजा रखने का फायदा यह है कि पाचन तंत्र को आराम मिलता है। शरीयत के मुताबिक जिंदगी गुजारने का संदेश देता है।

अकीदतमंदों की बढ़ी भीड़

विभिन्न मस्जिदों में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी। सुबह से शाम तक इबादत का दौर जारी है। शाम को रोजेदारों ने सामूहिक रूप में बैठकर रोजा इफ्तार किया गया। मगरिब की नमाज अदा कर अमन चैन की दुआ मांगी गई।

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