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नाटक में ध्यान केंद्रित करने बच्चों ने वुडन आर्ट की ट्रेनिंग ली, चेन, ताला व चाभी बनाई

3 वर्ष पहले
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लकड़ी के एक ही टुकड़े में सिर्फ कुछ कट लगाकर बच्चों को साढ़े तीन फीट लंबी चेन, कमर पट्टा (करधन) आदि बनाना सिखाया गया। इन कलाकृतियों को बड़े ही धीरज के साथ बनाना बताया गया। इसे मन की एकाग्रता और किसी दबाव को सहने की क्षमता विकसित करने में सहयोगी बताया गया। बच्चों के लिए यह एक नया अनुभव रहा।

75वें स्थापना दिवस की तैयारी में इप्टा के कलाकार पांच नाटक तैयार कर रहे हैं। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी शामिल हैं। सुबह बच्चों को अपने एक्ट में पूरी तरह फोकस करने के लिए नया ट्रिक अपनाया गया। बच्चों को िम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज अंचल के कलाकार श्रवण कुमार चोपकर ने वुडन आर्ट की जानकारी दी। उन्हें सावधानी के साथ कलाकृतियां बनाना सिखाया। अपनी कला का प्रदर्शन भी किया।

चोपकर ने 20 सेकंड में बनाए मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा की मूर्ति

चोपकर ने बच्चों को 20 सेकंड के भीतर मंदिर, मस्जिद , गुरुद्वारा और चर्च की कलाकृतियां बनाना सिखाया। प्रत्येक वुडन आर्ट बनाने में उन्हें सिर्फ 5-5 सेकंड लगे। उन्होंने बच्चों के साथ शेयर की। बताया कि पहले से तैयारी हो तो ज्यादा समय नहीं लगता।

यह चीजें बनाना सिखाया : बच्चों को कार्यशाला में लंबी चेन, सांकल, चाबी, ताला, कमर पट्टा, करधनी, चादर, इंटीरियर डेकोरेशन में आने वाली शो पीस आदि बनाना सिखाया गया। इसकी तकनीक भी बताई गई। लकड़ी की पहले सफाई करना, उसका मेजरमेंट फिर उसमें हल्के हाथों से कट लगाना बताया गया।

थिएटर गेम्स में बच्चों ने किया अभ्यास 5 नाटकों के मंचन की हो रही तैयारी

इससे पहले बच्चों ने अपने नाटकों का रिहर्सल किया। इसमें उन्हें अलग-अलग थीम देकर पांच मिनट के भीतर स्क्रिप्ट बनाकर एक्ट करने को कहा गया। उन्हें संवाद अदायगी, वार्तालाप और अन्य चीजों की बारीकियां बताई। साथी का सहयोग करना बताया।

जानिए ... बच्चों को क्या क्या चीजें बताई गईं

लकड़ी का चयन करना:
चोपकर ने बच्चों को पहले बनाई जाने वाली चीज के अनुसार लकड़ी का चयन करना बताया। जैसे चेन या फिर करधनी बनानी हो तो स्टीक जैसी लंबी लकड़ी की जरूरत होगी। इसी तरह कोई शो पीस बनाना हो तो पटनी की तरह लकड़ी चाहिए। कोई अन्य कलाकृति के अनुसार लकड़ी का चयन जरूरी है। इसमें गांठ नहीं होनी चाहिए। यह लकड़ी सीधी होनी चाहिए। इससे मूर्ति बनाने में आसानी होती है।

सागौन की ही लकड़ी क्यों : उन्होंने बताया कि सागौन की लकड़ी में तेल रहता है। इससे इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है। यह अन्य लकड़ियों की तुलना में नरम होती है। इससे इसमें कट लगाना आसान होता है। इसमें इलास्टिसिटी भी होती है, जिससे उसके फटने की संभावना बहुत कम रहती है। कलाकृतियां बन जाती हैं, जो ज्यादा आकर्षक लगती है। लोगों का ध्यान भी इस ओर खिंचता है।

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