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नेत्रों के पाप से बचें, रावण का इसीलिए हुआ था अंत: पं. कृष्ण

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर | नंदिनी अहिवारा

ग्राम करंजा भिलाई में चल रहे भागवत कथा के चौथे दिन पं. चंपेश्वर कृष्ण महाराज नंदकट्टी वाले ने अजामिल चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जीवन में कथा मार्गदर्शिका है।

भगवान का नाम ही परमात्मा का स्वरूप है। उनके नाम मात्र के आश्रय से पापों का क्षय हो जाता है। इसलिए भगवान का नाम पर अटूट श्रद्धा रखनी चाहिए। अजामिल जन्म से तो अधम था, लेेकिन प्रभु के नाम का आश्रम लेकर कृतार्थ हो गया। हम सब आज माया में फंसे हैं। इसलिए आंख जैसे र| को संभालने की जरूरत है। भागवत गीता में कहा गया है कि बिना वजह किसी को देखना नहीं चाहिए। जैसे रावण ने आंख से पाप किया, माता जानकी को देखा। इसलिए उनकी बुद्धि बिगड़ी और आंख से पाप हुआ। जीवन कलंकित हो गया। पं. चंपेश्वर ने कहा कि अजामिल की बुद्धि अब त्रिगुणात्मक प्रकृति से परे होकर भगवान के स्‍वरूप में स्थित हो गई। इसलिए उनके सारे पाप दूर हो गए और सदगति मिली।

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