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सबसे बड़ी कंपनी सेल को मुनाफे में टाटा स्टील व जेएसडब्ल्यू ने पछाड़ा

3 वर्ष पहले
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वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए स्टील उत्पादन से जुड़े प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इनमें जिंदल स्टील को छोड़कर बाकी दो प्रमुख कंपनी टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू मुनाफे में रही। हालांकि देश की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनी सेल के चौथे तिमाही के नतीजे घोषित होना बाकी है। लेकिन तीसरे तिमाही तक के नतीजों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी बड़े घाटे की ओर बढ़ रही है।

निजी स्टील कंपनियों में वित्त वर्ष 2017-18 में सबसे अधिक मुनाफे वाली स्टील कंपनियों में जेएसडब्ल्यू रही। उसका कर पूर्व लाभ 7075 करोड़ और कर पश्चात लाभ 4625 करोड़ रहा। जबकि वित्तीय वर्ष 2016-17 में क्रमश: 5131 करोड़ व 3577 करोड़ था। टाट स्टील का कर पूर्व लाभ 6638 करोड़ और कर पश्चात लाभ 4169 करोड़ रहा। यह गत वर्ष 5356 करोड़ और 3444 करोड़ था। इस प्रकार जेएसडब्ल्यू ने गत वर्ष की तुलना में शुद्ध लाभ में 1048 करोड़ और टाटा स्टील ने शुद्ध लाभ में 725 करोड़ की बढ़ोतरी की है।

यूआरएम में क्षमता अनुसार उत्पादन होने पर सुधर सकती है स्थिति।

स्टील कंपनी को मुनाफा व घाटा एक नजर में

कंपनी घाटा/मुनाफा

सेल तीसरी तिमाही तक कर पूर्व 1945 करोड़ का घाटा

जेएसडब्ल्यू कर पूर्व लाभ 7075 करोड़, कर बाद लाभ 4625 करोड़

टाटा स्टील कर पूर्व लाभ 6638 करोड़, कर बाद लाभ 4169 करोड़

जिंदल स्टील कर पूर्व घाटा 671 करोड़, कर बाद घाटा 361 करोड़

चौथे तिमाही में मुनाफे के बाद भी जिंदल घाटे में

सेल की प्रतिस्पर्धी स्टील कंपनियों में जिंदल स्टील एंड पावर जरूर घाटे में है। उसका कर पूर्व घाटा 671 करोड़ और कर पश्चात घाटा 361 करोड़ है। कंपनी के कुल आय 17523 करोड़ था लेकिन खर्च 16285 करोड़ रहा।

सेल की दिक्कतें

वित्तीय वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही के बाद स्टील मार्केट में मामूली सुधार आया। जिसका निजी क्षेत्र के कंपनियों ने भरपूर लाभ उठाते हुए अपने उत्पाद को मार्केट में खपाया। लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी उत्पादन कंपनी सेल अपनी आंतरिक समस्याओं के चलते अवसर का लाभ उठाने में असफल रही। जिसके चलते वह इस वर्ष भी घाटे से उबर नहीं पाई।

घाटे के प्रमुख कारण

सेल की सबसे बड़ी यूनिट बीएसपी में आधुनिकीकरण और एक्सपांशन प्रोजेक्ट की लेटलतीफी रेलपांत का उत्पादन टार्गेट से काफी पीछे यूआरएम में उत्पादन शुरू होने के बाद भी तकनीकी खामियों के चलते क्षमता मुताबिक नहीं हो पा रहा उत्पादन बीएसपी में ब्लास्ट फर्नेस-8 में क्षमता मुताबिक हाट मेटल का उत्पादन ना होना एसएमएस-3 का आधा-अधूरा निर्माण।

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