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जिस बच्चे को चढ़ाया संक्रमित खून, उससे बिना मिले ही दिल्ली लौट गई बाल आयोग की टीम

3 वर्ष पहले
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम संक्रमित खून चढाएं जाने के मामले की जांच करने दिल्ली से भिलाई आई थी, टीम के सदस्य उस पीड़ित बच्चे से बिना मिले लौट गए, जिसके लिए जांच करने दिल्ली से आई। मंगलवार को पांच घंटे तक सेक्टर-9 अस्पताल में जांच के बाद लौटते समय टीम के सदस्यों को जब इस बात का अहसास हुआ तो उन्होंने पिता से बच्चे की फोटो उपलब्ध कराने कहा। फोटो लेकर टीम सीईओ से मिलने रवाना हो गई।

इसके चलते आयोग के जांच पर सवाल उठने लगे हैं। इतना ही नहीं टीम के सदस्यों ने उनका आतिथ्य स्वीकार किया। जिनके खिलाफ मिली शिकायत पर जांच करने टीम दिल्ली से आई थी। वहीं ब्लड बैंक का लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद बीएसपी प्रबंधन भी इस बार अलर्ट नजर आया। इसके पूर्व संक्रमित खून चढाएं जाने के मामले की जांच के लिए जितनी भी कमेटियां सेक्टर-9 अस्पताल पहुंची प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन बाल संरक्षण आयोग की टीम के सदस्यों का जो अतिथि सत्कार किया गया उससे देखकर लगा कि प्रबंधन कोई जोखिम नहीं उठाना चाह रहा। बकायदा, टीम को ठहराया भी बीएसपी के भिलाई निवास में। टीम के सदस्यों के खिदमत में ऐसे चिकित्सक भी लगे थे जिनका प्रकरण से कोई वास्ता नहीं था।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम ने मंगलवार को सेक्टर-9 अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान ब्लड बैंक की स्थिति के बारे में भी टीम ने जानकारी ली। फिर टीम दिल्ली चली गई।

मामले की जांच के लिए पहुंची टीम ने कहंा-क्या देखा, जानिए...

रेडक्रॉस सोसाइटी: बाल संरक्षण आयोग की टीम के सदस्य मंगलवार को सबसे पहले रेडक्रास सोसाइटी द्वारा जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक पहुंचे। यहां के कामकाज का अवलोकन किया। इस ब्लड बैंक को शिफ्ट किया जा रहा है। टीम के सदस्यों ने पूछा कि कब तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा? इस पर ब्लड बैंक प्रभारी ने बताया कि डेढ़ से दो महीने में इस प्रक्रिया को पूरा कल लिया जाएगा।

चिकित्सकों को किया तलब: इसके बाद टीम सुबह साढ़े 11 बजे सेक्टर-9 अस्पताल के लिए रवाना हुई। यहां डायरेक्टर एके गर्ग के चेंबर में उन्होंने ब्लड बैंक के चिकित्सकों के साथ ही आयोग की टीम ने लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों को भी तलब किया।

जांच टीम ने चिकित्सकों को लगाई फटकार

ब्लड बैंक और पीडियाट्रिक विभाग के चिकित्सकों से संक्रमित खून चढाएं जाने की शिकायत पर उनका पक्ष सुना। इस दौरान कई बार ऐसी भी स्थिति बनी जब चिकित्सकों को टीम के सदस्यों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। चर्चा ऐसी भी है कि सदस्यों ने यहां तक कह दिया कि नाको टीम की जांच रिपोर्ट सही है।

दस्तावेजों का किया परीक्षण: टीम के सदस्यों ने ब्लड बैंक से उन सभी दस्तावेजों को डायरेक्टर के चेंबर में मंगवाया जिस पीरियड में दो बच्चों को संक्रमित खून चढाएं जाने की शिकायत है। टीम के सदस्यों ने तमाम दस्तावेजों की बारीकी से जांच की।

जांच रिपोर्ट का अवलोकन: दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद नाको व फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की जांच रिपोर्ट का अवलोकन भी किया। टीम करीब साढ़े 4 घंटे तक डायरेक्टर के चेंबर में ही रहते हुए जांच के कार्य को अंजाम दिया।

चूक तो नहीं, इसलिए 15 मिनट तक ब्लड बैंक देखा

डायरेक्टर के चेंबर से निकलने के बाद टीम के सदस्य ब्लड बैंक पहुंचे। यहां उन्होंने खून की जांच की प्रक्रिया को समझा। साथ ही बैंक में जांच के उपलब्ध संसाधनों की जानकारी भी हासिल की। बताया गया कि इस दौरान टीम ने प्रभारी चिकित्सक को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर हाल में न्यूक्लिक एसिड एमप्लीफिकेशन जांच की सुविधा उपलब्ध कराए।

पिता से बोले-विदेश में भी करवाएंगे बच्चे का इलाज

इसके पूर्व सोमवार की रात संक्रमित खून चढाएं बच्चे के पिता से टीम के सदस्यों ने पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चे के स्वास्थ के लिए अच्छे से अच्छा इलाज इसके लिए बीएसपी प्रबंधन को निर्देशित किया जाएगा। फिर इसके लिए देश या विदेश ही क्यों ना जाना पड़े। पूरा खर्च प्रबंधन वहन करेगी। इलाज के लिए बाहर जाने पर टीए-डीए और ठहरने का खर्च का भुगतान भी प्रबंधन ही करेगी। यह व्यवस्था करने सेल प्रबंधन को आदेशित किया जाएगा।

कार्रवाई की जाएगी...

सेक्टर-9 अस्पताल के ब्लड बैंक समेत रेडक्रॉस सोसाइटी व संबंधित चिकित्सकों से पूछताछ कर ली गई है। इसलिए पीड़ित बच्चे से नहीं मिल पाए। कार्रवाई निमयानुसार की जाएगी। बिनोद कुमार साहू, आेएसडी, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग

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