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कर्मियाें के प्रमोशन व छुट्‌टी में भेदभाव का उठाया मुद्दा

3 वर्ष पहले
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इस्पात श्रमिक मंच एवं छत्तीसगढ़ मजदूर संघ (सीजीएमएस) की बैठक में अन्य इकाइयों के मुकाबले मिल रही कम सुविधाओं के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। जिसमें प्रमोशन व छुट्टियों को मुद्दा प्रमुख है। कर्मियों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि कंपनी की फ्लैगशिप और सबसे अधिक प्रॉफिट वाली यूनिट होने के बाद भी कर्मियों की सुविधाओं के मामले में बीएसपी अन्य इकाइयों के मुकाबले पीछे हैं।

एक तरफ अन्य संयंत्रों में अनिवार्य रुप से ग्रेड प्रमोशन 3 साल में हो रहे हैं तथा आकस्मिक अवकाश को साप्ताहिक अवकाश से अलग गिना जा रहा है। वहीं बीएसपी में कम्यूटेटीव लीव की शुरुआत होने के बाद भी आज वह राउरकेला से मामले में भी पीछे है। कार्यकारिणी की बैठक में श्रमिक मंच और मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने समीक्षा करने में पाया की कई सुविधाओं और समझौतों में बीएसपी स्पष्ट रूप से अन्य इकाइयों से पीछे हो गया है।

सीएल और साप्ताहिक अवकाश अलग-अलग

इस्पात श्रमिक मंच के महासचिव राजेश अग्रवाल ने बताया की उनकी यूनियन बीएसपी में छुट्टियों की नियमों में जिस परिवर्तन की बात कर रही है। वह अन्य इकाइयों में पूर्व से लागू हैं सिर्फ बीएसपी को ही इस से वंचित रखा गया है। उन्होंने बताया कि बोकारो और राउरकेला से मिली जानकारी के अनुसार सीएल के बीच साप्ताहिक छुट्‌टी आने पर उसकी गणना नहीं की जाती है।

उत्पादन में कीर्तिमान के बाद भी ग्रेड प्रमोशन में

सीजीएमएस के प्रवक्ता प्रदीप विश्वास ने बताया की जहां राउरकेला में अनिवार्य रूप से ग्रेड प्रमोशन 3 वर्ष में दिया जाता है। वही अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन देने के बावजूद बीएसपी कर्मियों के लिए प्रतिनिधि यूनियन ऐसा कोई भी समझौता करने में पूरी तरह नाकाम रही है। इस तरह कर्मचारी कैरियर के मामले में अन्य सयंत्र कर्मियों से पीछे रह जा रहे हैं।

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