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बुरे कर्मों का फल हमेशा दुखों का बनता है कारण

3 वर्ष पहले
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हाउसिंग बोर्ड के सूर्य भवन में चल रहे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के उत्कर्ष शिविर में ब्रह्माकुमारी प्रीति बहन ने कर्म पर व्याख्यान दिया। उन्होंने श्रेष्ठ कर्म और संबंध के बारे में बताया। कहा कि कोई व्यक्ति धन से अमीर है और क्यों कोई मेहनत करते हुए भी गरीब रहता है। वास्तव में कर्म के फल दो प्रकार के होते है, प्रत्यक्ष फल और अप्रत्यक्ष फल।

कर्म फल को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम ईश्वर की अमानत इन कर्मेंद्रिय का दुरुपयोग करते हैं तो हमें उन्हीं कर्मेन्द्रियों द्वारा कोई न कोई दुख कर्म फल के रूप मे भोगना जरूर पड़ता है। इसलिए ईश्वर की अमानत का सदा सदुपयोग करना चाहिए। दूसरा अप्रत्यक्ष फल है, जो पूरी तरह सद्कर्माें पर आधारित होता है। हमें जीवन में हमेशा अपने साथ-साथ दूसरों के हित की सोचनी चाहिए। यदि हम अपने कर्मों को अच्छा रखेंगे तो ईश्वर उसका फल भी अच्छा ही देगा। अंत में शिक्षिका के. नंदिता प्रकाश ने बच्चों को सरल टिप्स देते हुए बड़े रमणीक तरीके से अंग्रेजी बोलना सिखाया। इस दौरान बच्चे काफी उत्साहित नजर आए। अन्य आयाेजन भी हुए।

हाउसिंग बोर्ड में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विवि का आयोजन, ब्रह्माकुमारी बहन प्रीति ने जीवन में कर्मों का बताया प्रभाव

शिविर के आखिर में शिक्षका नंदिता ने बच्चों को अंग्रेजी बोलने के टिप्स दिए।

जीवन में संबंधों को बेहतर बनाने ये 4 बातें जरूरी

1 भरोसा: हमारे साथियों पर हमारा विश्वास हो, यह हमारे बीच संबंध को सशक्त बनाता है। किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए सबसे बड़ी चीज भरोसा होती है। यानी हम किसी आयोजन का अकेले नहीं कर सकते। जब हम अनेक होेते हैं तो एक-दूसरे पर भरोसा जरूरी है। तभी हम अपने लक्ष्य को पा सकते हैं। मनुष्य के हर रिश्ते में भरोसा सबसे ज्यादा जरूरी है।

2 अच्छी भावना: हर किसी को अपने समान या अपने बराबर समझकर उनके प्रति शुभ भावना रखना। कभी किसी को अपने से कम या छोटा समझकर तिरस्कृत न करें। अहम का भाव त्यागें।

4 प्रोत्साहन: एक-दो की अच्छाई देखते हुए प्रशंसा के दो बोल भी दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए एक माध्यम बन जाता है। रिसर्च द्वारा ये साबित हो चुका है कि प्रोत्साहन के लिए केवल धन और प्रमोशन काफी नहीं है। व्यक्ति का मनोबल भी बढ़ाना जरूरी है। ताकि वह सदैव आशावादी बना रहे और अपने काम व लक्ष्य के प्रति सजग होकर आगे बढ़ता रहे।

3 आपसी स्नेह: हमेशा आपस का स्नेह बना रहे, उसके लिए जरूरी है कि हम एक-दूसरे की अच्छाई देखने की आदत डालें। इससे प्रेम व भाइचारा की भावना बढेगी और आपसी संबंध भी बेहतर होंगे।

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