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फोरम का फैसला चिटफंड कंपनी यालको ग्रुप के खिलाफ 228 ने वाद दायर कर मांगे 3.4 करोड़ रुपए

3 वर्ष पहले
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लीगल रिपोर्टर | दुर्ग/भिलाई

चिटफंड कंपनी यालको ग्रुप के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। यालको रियल स्टेट एंड एग्रो फार्मिंग लिमिटेड सुपेला व यालको सेविंग एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी नामक संस्था ने करीब 228 लोगों से करीब 3.4 करोड़ रुपए वसूले और फर्म को वर्ष 2015 में बद कर दिया। मामले को लेकर पीड़ित पक्ष फोरम पहुंचा। अक्टूबर 2017 में इसे लेकर फोरम में आवेदन किया गया। जहां विचारण के बाद सोमवार को अध्यक्ष मैत्रीय माथुर, सदस्य राजेंद्र पाध्ये ने इस पर आदेश जारी किया। उन्होंने 228 मामलों में 3.4 करोड़ रुपए की राशि मय ब्याज आदेश दिनांक से मय ब्याज पक्षकारों को देने का आदेश किया है। मामले में दोनों फर्मों के संचालक प्रेम लाल देवांगन व ममता किरण देवांगन पहले से जेल में बंद है।

प्रकरण के मुताबिक, वर्ष 2003 से फर्म में अस्तित्व में आई। इसमें 7 साल में राशि दुगुना करने, जमीन पर निवेश, भेड़-बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन सहित अन्य धंधों के लिए राशि निवेश कराया।

राशि डबल और भेड़-बकरी पालन के नाम पर वसूले करोड़ों, उस कंपनी को 1 माह में राशि लौटाने आदेश

वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

इधर कलेक्टोरेट में चिटफंड कंपनी के पीड़ित अपने पैसों के लिए दावा कर रहे हैं। कलेक्टोरेट में यह भीड़ रोजाना लग रही है। प्रशासन ने पीड़ितों से जरूरी दस्तावेज मांगे हैं। फिर समाधान होगा।

क्या कुछ आदेश किया फोरम ने

फोरम ने इस मामले जमा कराई गई राशि करीब 3.4 करोड़ रुपए आदेश दिनांक के बाद से 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश जारी किया। साथ ही 20 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति व 5 हजार रुपए प्रत्येक मामले में वाद व्यय भी मंजूर किया।

राजनांदगांव से शुरू हुई कंपनी ने दुर्ग-भिलाई में ब्रांच खोल लोगों को ठगा

इस मामले में एक महीने में निवेशकों को रकम लौटाने कहा गया है। मामले में दोनों आरोपी जेल में बंद है। इसलिए जानकार कह रहे हैं कि, अब इनकी प्रॉपर्टी कुर्क करके ही रकम लौटाई जाएगी। चिटफंड कंपनी एक्ट 2015 के मुताबिक जिन कंपनियों ने निवेशकों के रुपए नहीं लौटाए हैं। प्रॉपर्टी कुर्क की जाएगी।

को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनाकर करते हैं ठगी

आपको जानकर हैरानी होगी कि, अब तक जिन कंपनियों के खिलाफ मामले दर्ज हैं। उसमें क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी ज्यादा है। जिन्होंने नियमों को दरकिनार कर रुपए का लेन-देन शुरू किया। ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि, सोसाइटी नॉर्म्स में उल्लेख है कि, चिटफंड कंपनी ऑपरेट नहीं कर सकते हैं।

अब प्रॉपर्टी कुर्क करके लौटाई जा सकती है रकम

चिटफंड कंपनियों का बढ़ रहा कारोबार, क्योंकि...

74 से अधिक कंपनी अब भी संचालित है दुर्ग संभाग में।

अगर आपका डूबा है कंपनी में पैसा तो आप अपनाएं ये प्रोसेस...

चिटफंड एक्ट 2015 के धारा 1 में कलेक्टर को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार दिया गया है। उन्हें कंप्लेन करें।

धारा 6 में कलेक्टर को ऐसी कंपनी के संपत्ति कुर्क करने या अभिरक्षा में रखने का अधिकार है।

धारा-7 में कलेक्टर को संपत्ति सीधे या कोर्ट के जरिए नीलाम कर पैसे लौटाने का अधिकार है।

पुलिस ऐसे फ्रॉड कंपनियों की संपत्ति की पहचान कर जिला प्रशासन को सूची सौंपती भेजती है। थाने में कई शिकायत है।

पैसा दिलाने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से ही कुर्क की कार्रवाई होगी।

जानिए, आरबीआई और सेबी के नॉर्म्स, नहीं कर रहे अमल

कोई भी कंपनी लोगों से डायरेक्ट रुपए जमा नहीं करवा सकती। कंपनी के रुपए को भी दूसरी कंपनी में इन्वेस्ट करने से पहले नियमों का पालन करना पड़ता है।

जो कंपनी रुपए का लेनदेन करती है, उसका रजिस्ट्रेशन आरबीआई या सेबी में होना चाहिए। उन्हें भी एक सीमित दायरे में रहकर रुपए का लेनदेन करना चाहिए।

चिटफंड कंपनी लोगों को रुपए के बदले में बांड थमाती है। जो गलत है। क्योंकि सेबी के नॉर्म्स में स्पष्ट है कि बिना सेबी परमिशन से बांड नहीं दिया जा सकता है।

सेबी ने चेतावनी जारी कर कहा था कि निवेश से पहले पूरी जानकारी जुटा ले।

कहीं भी रुपए इन्वेस्ट कर रहे हैं तो ये पहले करें...

निवेश से पहले किसी भी चिटफंड कंपनी के बारे में पूरा पता करें। कुछ गाइडलाइन है, उस पर जरूर नजर रखें।

20 से अधिक कंपनी दुर्ग जिले में ऑपरेट कर रही है।

आरबीआई और बीमा नियमन एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) की वेबसाइट का विजिट कर गाइडलाइन पढ़ ले।

30 से अधिक कंपनियों के खिलाफ थाने में शिकायत है।

इस केस में 228 तो सामने आए प्रदेशभर में चल रहा था रैकेट

यालको ग्रुप के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में 228 लोगों ने वाद पेश किया। जो दोनों फर्मों में पैसे जमा कराए। इसके बाद 2015 में कंपनी को अचानक बंद कर दिया गया। इसके बाद से लगातार पैसे जमा कराने वाले पुलिस व प्रशासन के चक्कर काटते रहे। अक्टूबर 2017 में मामला फोरम पहुंचा। दोनों आरोपी जेल में बंद है। प्रदेशभर में ग्रुप चल रहा था।

कारनामे ऐसे किए हैं कि पति राजनांदगांव तो प|ी दुर्ग जेल में

इस मामले में दोनों प्रमुख आरोपी पहले से जेल में निरुद्ध है। इसमें प्रेम लाल देवांगन राजनांदगांव जिला जेल में निरुद्ध हैं। वहीं ममता किरण देवांगन महिला केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध है। दोनों पर इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज है, जिस पर फिलहाल कोर्ट में सुनवाई जारी है।

फोरम का यह आदेश देश में अपने तरह का पहला फैसला...

फोरम की तरफ से जारी आदेश देश में अपने तरह का पहला आदेश है। जब एक साथ 228 में आदेश जारी हुआ। दोनों आरोपियों को महीनेभर के अंदर राशि लौटानी होगी। अन्यथा पुन: इस मामले को लेकर फोरम की शरण ली जाएगी। मीनेंद्र सोनी, अधिवक्ता

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