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प्लांट लगाने 1 माह में जारी करें निविदा, नहीं तो कर देंगे केस

3 वर्ष पहले
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बीएसपी प्रबंधन को इस वर्ष के अंत तक हर हाल में कचरे से बिजली बनाने का प्लांट स्थापित करने का टार्गेट दिया गया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया को भी एक महीने में पूरा करना होगा। यदि टेंडर में ही लेटलतीफी हुई तो भिलाई निगम के साथ बीएसपी को एनजीटी में पार्टी बना दिया जाएगा।

चेतावनी शुक्रवार को नगरीय निकाय के डायरेक्टर निरंजन दास ने बीएसपी के प्रतिनिधियों को दी जो डायरेक्टोरेट द्वारा मंत्रालय में आयोजित वेस्ट टू एनर्जी की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। दरअसल इस बार के स्वच्छता सर्वेक्षण में ईस्ट जोन में झारखंड के बूंदू ने भिलाई को पछाड़ने सफलता पाई। पिछले बार वह सर्वेक्षण में अव्वल था। भिलाई के पिछडऩे को राज्य शासन ने गंभीरता से लिया। समीक्षा में यह बात सामने आई कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित कर लिया गया होता तो यह स्थिति नहीं बनती। क्योंकि प्लांट के स्थापित करने में ही 300 नंबर निर्धारित किए गए थे। जिसके नहीं होने से भिलाई निगम इस बार के सर्वेक्षण में पिछड़ गया। बैठक में बीएसपी से डीजीएम सुब्रत प्रहराज, आयुक्त केएल चौहान, स्वास्थ्य अधिकारी केके यादव मौजूद रहे।

वेस्ट टू एनर्जी समिति की हुई बैठक

डायरेक्टर दास हुए नाराज

डायरेक्टर दास ने प्लांट स्थापित करने में हो रही देरी का कारण बताने को कहा। बीएसपी के प्रतिनिधियों ने बताया कि टेंडर बुलाया गया था। दो पार्टियों ने भाग लिया, एक हैदराबाद की और दूसरी पार्टी जगदलपुर की थी। टेंडर शर्तों के मुताबिक पात्र नहीं थे। लिहाजा टेंडर निरस्त कर दी गई। दास ने एक माह का समय दिया।

जबलपुर में बन रहा ऐसा ही वेस्ट एनर्जी प्लांट

मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसा ही प्रयोग जबलपुर में किया है। जहां कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाया जा रहा है। अगले चार महीने में यह प्लांट शुरू हो जाएगा। यहां रोजाना 300 से 500 टन कचरा निकलता है। जिससे 10 मेगावाट तक बिजली पैदा की जाएगी। निजी कंपनी एसएलए और हिटाची कंपनी पीपीटी मॉडल से प्लांट लगा रही है।

प्लांट में रोजाना 100 से 500 टन कचरा चाहिए

प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए रोजाना 100 से 500 टन कचरे की आवश्यकता होगी। अभी भिलाई निगम से रोजाना 200 से 250 टन कचरा डंप हो रहा है। टाउनशिप से भी कचरा 100 टन से अधिक निकल रहा है। यहां आसपास का कचरा लाया जाएगा।

कचरे से बनेगी बिजली

दुर्ग-भिलाई को एक क्लस्टर बनाया गया है। शहर का कचरा इकट्ठा होगा। उतई, अहिवारा, जामुल, कुम्हारी और चरोदा का कचरा प्लांट में लाया जाएगा। इन सभी से रोजाना 500 टन से अधिक कचरा इकट्ठा होगा। इससे 10 मेगावाट बिजली बन सकेगी। बिजली उत्पादन होने के बाद उसका उपयोग शहर के आसपास के क्षेत्रों में करेंगे।

सेमरिया में नहीं लगेगा कचरा प्रोसेसिंग का प्लांट

प्लांट के लिए बीएसपी ने उमरपोटी में 13.50 एकड़ जमीन चिन्हित किया है। पहले सेमरिया में प्लांट लगाने की योजना थी। निगम को जमीन हैंड ओवर भी कर दी गई थी। बाद में योजना में फेरबदल करते हुए उमरपोटी में बीएसपी की जमीन को फाइनल किया गया।

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