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बिना डॉग हाउस के कुत्ते पकड़ने वाली एजेंसी को ठेका दे रहा निगम, विपक्ष ने रद्द करने की मांग

3 वर्ष पहले
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शहर में आवारा कुत्तों का आतंक है, सुपेला इलाके में ज्यादा केस सामने आए।

इस एजेंसी को काम देने से उठ रहे कई सवाल?
एजेंसी रद्द हुई थी तो टेंडर में कैसे किया पार्टिसिपेट? : इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि दो साल पहले ही निगम ने एजेंसी को रद्द करने की बात कही थी। लेकिन जब इस साल के लिए टेंडर कॉल किया तो उसने भी पार्टिसिपेट किया। आखिर कैसे इस एजेंसी को पार्टिसिपेट करने का मौका मिला। हालांकि जिम्मेदार यह कहकर कन्नी काट रहे है कि ऑनलाइन टेंडर हुआ था।

इधर, शहर में आवारा कुत्तों का आतंक, लोग परेशान
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ते ही जा रहा है। इसके चलते लोग परेशान है। डॉग बाइट के बढ़ते केस को लेकर निगम के पास प्लानिंग भी नहीं है। यही हाल टाउनशिप का है। जहां बीएसपी प्रबंधन का दावा है कि, आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद नसबंदी की जा रही है। पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

न डॉग हाउस और न बेहतर रिकॉर्ड : दो साल पहले जब एजेंसी को निगम ने ठेका दिया था, तब यह बात सामने आई थी कि कुत्ता पकड़ने वाली एजेंसी के पास डॉग हाउस भी नहीं है। यही नहीं, एक्सपर्ट्स टीम भी नहीं। यह बात बाद में निगम के अफसरों ने भी स्वीकार की थी कि एजेंसी के पास ये संसाधन नहीं है। विपक्ष का कहना है कि, एजेंसी का पुराना रिकॉर्ड ठीक नहीं, तो काम क्यों दिया जा रहा है?

सीधी बात
अभी फाइनल नहीं हुआ है, इस मामले में उच्च अधिकारी निर्णय लेंगे, नियमों का पालन होगा
आवारा कुत्ता पकड़ने के लिए एजेंसी तय हो गई क्या?

इसका टेंडर ओपन हुआ है। छत्तीसगढ़ इंटरप्राइजेस का रेट कम आया है।

इस एजेंसी के बारे में आपको पता है कि नहीं?

हां कुछ-कुछ पता है। दो साल पहले शिकायत मिली थी।

विपक्ष ने इसके काम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई तो क्यों दे रहे इसे?

अभी फाइनल नहीं हुआ है। इस संबंध में उच्च अधिकारी निर्णय लेंगे।

एजेंसी के पास डॉग हाउस है कि नहीं?

बिल्कुल होना चाहिए। सारे नियमों का पालन करवाएंगे।

पक्ष-विपक्ष आमने-सामने
दो साल पहले हमने इस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर आपत्ति की थी। एजेंसी को वर्कऑर्डर निरस्त हुआ था। क्योंकि, एजेंसी ने ग्राउंड में कुछ भी काम नहीं किया था। किसी योग्य एजेंसी को ही काम देना चाहिए। यह बहुत गंभीर विषय है। निगम के अफसर व शहर सरकार की मिलीभगत है। पीयूष मिश्रा, विपक्षी पार्षद

हमने ऑनलाइन टेंडर कॉल किया था। उसके तहत यह एजेंसी आई है। नियमों के तहत एजेंसी से काम लेंगे। विपक्ष की वजह से दो डेढ़ साल तक आवारा कुत्ता नहीं पकड़ पाए। इसके लिए वही जिम्मेदार है। एजेंसी के बारे में फैसला जल्द होगा। काम करने के बाद ही भुगतान करेंगे। इसकी मॉनीटरिंग होगी। लक्ष्मीपति राजू, चेयरमैन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम भिलाई

धर्मेंद्र मिश्रा, प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम भिलाई

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