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ब्लड के इंतजार में अब नहीं होगी मौतें, एक फोन कॉल पर मरीज तक पहुंचेगी यूनिट

3 वर्ष पहले
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जिले के किसी भी हिस्से में अब ब्लड की कमी या इसके इंतजार में अब मौतें नहीं होगी। डिलेवरी के दौरान अगर प्रसूता को खून की जरूरत पड़ी या दुर्घटना में घायल व्यक्ति को खून चढ़ाना हो तो इसके लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और न ही किसी ब्लड बैंक का चक्कर काटना पड़ेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग बीटीबी योजना की शुरुआत कर रही है।

बीटीबी याने ब्लड ट्रांसपाेर्टेशन बाइक सेवा। यह सेवा जल्द ही जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जाएगा। राज्य के बड़े शहरों में सेवा के साथ जिले को भी इसमें शामिल किया गया है। ब्लड ट्रांसपोर्टेशन बाइक के लिए अलग कॉल सेंटर तैयार किया जा रहा है, इसके इमरजेंसी नंबर पर फोन करते ही ब्लड की सुविधा कॉलर को मिलेगी। बीटीबी ऐसे कॉल पर कुछ ही समय में संबंधित अस्पताल में ब्लड यूनिट लेकर पहुंचेगी। जानकारी के मुताबिक बीटीबी शहर सहित जिले के बड़े ब्लाॅकों में भी अपनी सेवा देगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू की जा रही बीटीबी सेवा

अत्याधुनिक उपकरण

बीटीबी के लिए जिले में 10 बाइक पहुुंचेगी। इसमें अत्याधुनिक उपकरण होंगे। इसके अलावा योजना के लिए जिले में अगल से स्टाफ यूनिट भी तैनात की जाएगी। संजीवनी व महतारी एक्प्रेस की तरह नंबर भी जारी किया जाएगा। कॉल आते ही ब्लड बैंक में यूनिट खंगाला जाएगा।

लंबी दूरी व सुविधा नहीं होने से हो रही मौतें

फिलहाल ब्लड की तत्काल उपलब्धता नहीं होने के चलते मौतें हो रही हैं। खासकर सीएचसी में गर्भवती महिलाओं को डिलवरी के दौरान ब्लड की जरूरत होने पर सीधे मेडिकल अस्पताल रेफर किया जाता है। इसके अलावा दुर्घटनाओं में भी ब्लड के लिए जरूरतमंद को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसी समस्याओं पर टीबीटी से नियंत्रण की उम्मीद है।

राजनांदगांव. जिले में 72 हेल्थ एंड अवेयनेस सेंटर स्थापित हो चुके हैं, जहां मुफ्त में मरीजों का शुगर, ब्लड और अन्य जरूरी जांच की जा रही है।

राेज 35 यूनिट ब्लड की जरूरत, होती है दिक्कत

जिले के 16 लाख आबादी के लिए मेडिकल हॉस्पिटल में एकमात्र ब्लड बैंक मौजूद है। यहां से रोजाना औसत 35 यूनिट ब्लड मरीजों को लिए लगती है। इसके अलावा इमरजेंसी, सड़क दुर्घटना व गर्भवती महिलाओं को भी इसी बैंक से ब्लड दिया जाता है। ऐसे में एकमात्र ब्लड बैंक होने की वजह से लोगों को रक्त के लिए सबसे अधिक परेशान होना पड़ता रहा है।

120 वेलनेस बनेंगे, 72 की शुरुआत हो चुकी

जिले में मुख्यमंत्री ग्राम स्वास्थ्य सुरक्षा केंद्र की शुरुआत हो चुकी है। इसमें 120 केंद्र बनने हैं, जिनमें से 72 की शुुरुआत हो चुकी है। यहां सप्ताह में एक दिन तय किया गया है जिसमें निशुल्क खून, शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य जांच की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि इसके खुलने से मरीजों की परेशानियां काफी कम हुई है।

इधर रक्तदान में इनका बड़ा योगदान

पिता के एक्सीडेंट के बाद प्रेरणा: अब तक खुद 75 बार रक्तदान कर चुके युवा व्यवसायी फर्णेंद्र जैन ने बताया कि 1995 में उनके पिता का एक्सीडेंट हो गया था। वे एक महीने तक भिलाई के अस्पताल में रहे। रोजाना लोगों को ब्लड डोनर नहीं मिलने की परेशानी उठाते देखा। तब से वे जरूरतमंदों को रक्त देते आए हैं।

तो गुरु ने बताया ब्लड नाड़ी में बहे नाली में नहीं: 40 बार अपना ब्लड दे चुके मनीष राजवानी ने ने कहा कुछ साल पहले जब अपने गुरु निरंकारी जी के सत्संग में गए थे,वहां गुरु ने रक्तदान का महत्व बताया। गुरु के शब्द थे ब्लड नाड़ी में बहे,नाली में नहीं। तभी से रक्तदान की उन्होंने ठान ली।

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