नेपाल प्रोजेक्ट: रक्सौल से काठमांडू तक बिछेगी 142 किमी नई लाइन, 17 हजार टन रेलपांत की सप्लाई करेगा बीएसपी
दिल्ली से काठमांडू (नेपाल) तक रेलवे लाइन बिछाना भिलाई स्टील प्लांट के लिए फायदे का सौदा साबित होने जा रहा है। परियोजना के तहत रक्सौल (बिहार) से काठमांडू तक नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। 142 किमी दूरी वाले इस ट्रैक में रेलवे बीएसपी की रेलपांत का इस्तेमाल करेगा। देश के बाहर बीएसपी की रेलपांत बिछाने की रेलवे की यह दूसरा बड़ी योजना है।
नेपाल के साथ कारोबार बढ़ाने के लिए भारत सड़क मार्ग के साथ रेलवे मार्ग का इस्तेमाल करेगा। नेपाल की सीमा से लगे बिहार के समस्तीपुर डिवीजन अंतर्गत रक्सौल सबसे नजदीक प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जो रेल मार्ग के माध्यम से सीधे दिल्ली से जुड़ा है। भारत और नेपाल सरकार की योजना वाया रक्सौल होते हुए काठमांडू तक ट्रेन दौड़ाने की है। इसके लिए भारत को रक्सौल से काठमांडू तक महज 142 किमी तक नई रेललाइन का निर्माण करना होगा। वहीं दिल्ली से रक्सौल तक नियमित रेल ट्रैक का ही इस्तेमाल किया जाएगा। निर्माण एजेंसी इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन (इरकॉन) होगी।
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दिल्ली
नेपाल में अब तक के सबसे बड़े रेलवे प्रोजेक्ट को शुरू होने में लगेंगे 2 साल
17 हजार टन लगेगी रेलपांत: एक किमी रेल ट्रैक बिछाने में 120 टन रेलपांत की डिमांड होती है। रक्सौल से काठमांडू की दूरी 142 किमी है। इस हिसाब से 17 हजार 40 टन रेलपांत की डिमांड होगी। भारतीय रेलवे को रेलपांत सप्लाई करने का एकाधिकार बीएसपी के पास है। लिहाजा रक्सौल से काठमांडू तक रेल ट्रैक तैयार करने में स्वाभाविक तौर पर बीएसपी की रेलपांत का ही इस्तेमाल होगा। यह अपने आपमें रिकॉर्ड है।
फायदा
नेटवर्क तैयार होने से बचेंगे तीन घंटे
आगरा
दिल्ली से रक्सौल तक पहले से मौजूद है रेलवे लाइन
अलीगढ
रक्सौल पूर्व मध्य रेलवे जोन के समस्तीपुर डिवीजन में है। रक्सौल से काठमांडू की दूरी 142 किमी है। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में 5 घंटे लगते हैं। रेल मार्ग तैयार होने पर इसी दूरी को दो से तीन घंटे में तय कर लिया जाएगा। ट्रैक विद्युतीकृत होगा। बोर्ड के अफसरों के मुताबिक सर्वे का काम जल्द शुरू होगा। इसमें फिजिबिलिटी और जमीन की उपलब्धता पर फोकस किया जाएगा।
दिल्ली से रक्सौल तक रेलवे ट्रैक है। दिल्ली से काठमांडू को जोड़ने के लिए रक्सौल से काठमांडू तक 142 किमी नई लाइन बिछानी होगी।
लखनऊ
रेल ट्रैक बनाने में लगेंगे तीन साल: दिल्ली से काठमांडू को ट्रेन सेवा से जोड़ने का लक्ष्य 2022 रखा गया है। यानि रेल ट्रैक निर्माण के कार्य में तीन साल का समय लगने की संभावना है। निर्माण 2020 में शुरू होने की उम्मीद है। बोर्ड एक साल में रक्सौल से काठमांडू तक रेल लाइन बनाने के लिए सर्वे कर रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगा। इसके बाद स्वीकृति, दोबारा फाइनल सर्वे होने, टेंडर आदि प्रक्रिया में सालभर लगेंगे। इसकी प्लानिंग पहले हुई थी।
कानपुर
गोरखपुर
बेतिया
अभी नेपाल में रेल रूट नहीं के बराबर: नेपाल में पहली रेलवे की कामर्शियल सर्विस 1927 में शुरू हुई। पहली रेल जयनगर से जनकपुर की बीच दौड़ीं। जिसकी दूरी 53 किमी है। वहीं दूसरी ट्रैक रक्सौल से सिरसिया के बीच बिछाई गई। जिसकी लंबाई महज 6 किमी है। अब वह भारत और चीन के साथ मिलकर इसमें विस्तार करना चाह रहा है। भारत इसमें पीछे नहीं रहना चाहता। इसके लिए दोनों देशों की ओर से प्लानिंग भी हुई थी।
काठमांडू
रक्सौल
इस साल बिहार के ये शहर जुड़ेंगे नेपाल से
नेपाल के सीमावर्ती शहरों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का फेस-1 का काम इस साल तक पूरा हो जाएगा। इसके तहत बिहार के जयनगर से नेपाल के जनकपुर और बिहार के जोगबनी से नेपाल के विराटनगर तक ट्रेन चलने लगेगी। इसके अलावा नेपाल और भारत रेलवे ट्रैक में विस्तार करने के तीन और प्रोजेक्ट पर विचार कर रहे हैं। इनमें न्यू जलपाईगुड़ी से काकरमिट्टा, नौतनवा-भैरहवा और नेपालगंज रोड-नेपाल शामिल हैं। इसके पूरा होने से बिहार के साथ सीमावर्ती राज्यों और नेपाल के बीच की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी।
5 हजार टन की सप्लाई हो चुकी
5650
टन रेलपांत की सप्लाई बीएसपी पहले फेज में कर चुका है।
बीएसपी ने अब तक 12 देशों में किया सप्लाई
बीएसपी अब तक 12 देशों को 6.7 लाख टन रेलपांत की सप्लाई कर चुका है। इनमें ईरान, दक्षिण कोरिया, इजिप्ट, सूडान, अर्जेंटीना, तुर्की, बांग्लादेश, घाना, न्यूजीलैंड, मलेशिया और श्रीलंका शामिल है। रेलवे को हर साल 14 लाख टन रेलपांत की जरूरत होती है। बीते पांच वर्षों में वह रेलवे की डिमांड को पूरी नहीं कर पा रहा है। सालभर से यूआरएम में उत्पादन शुरू होने के बाद आने वाले दिनों में बीएसपी प्रबंधन उम्मीद जता रहा है कि वह रेलवे की डिमांड को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा। इससे बीएसपी को होने वाला मुनाफा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पहले भी बीएसपी ने विदेशों में रेलपांत की सप्लाई की है। जहां से पॉजीटिव फीडबैक मिला। इस बार के लिए बीएसपी ने तैयारी शुरू कर दी है।
कनेक्टिविटी
5170
टन बीरगंज से रक्सौल तक के ट्रैक के लिए डिमांड की गई है।
प्राउड
7000
टन रेलपांत की डिमांड नेपाल को सप्लाई के लिए अब होगी।