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मालवीय: मुझे मिले 40 हजार वोट से भाजपा- कांग्रेस घबरा गई, मैं फिर निर्दलीय चुनाव लडूंगा

3 वर्ष पहले
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हाड़ा: आपको निर्दलीय चुनाव क्यों लड़ना पड़ा?

- मालवीय: मैंने 2008 व 2013 में कांग्रेस से टिकट मांगा लेकिन नहीं मिला। इसका कारण यह रहा कि यहां मेरी जाति के वोट नहीं हैं। किसी में योग्यता नहीं है फिर भी जाति के आधार पर टिकट देने से जनता का फायदा नहीं होने वाला। मांडलगढ़ में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी को 40 हजार वोट मिले हैं। जबकि मेरा कोई जातिगत आधार नहीं था।

हाड़ा: कांग्रेस जाति की राजनीति करती है इसी कारण आपका टिकट कटा?

- मालवीय: दोनों पार्टियां जाति देखकर टिकट देती हैं। वैसे चुनाव लड़ना मेरा नहीं, क्षेत्र की जनता का निर्णय था। इसलिए मैं लड़ा। भाजपा सरकार चार साल में काम करती तो हार की नौबत नहीं आती। वर्ष 2013 में भाजपा करीब 18 हजार वोट से जीती और उपचुनाव हार गई।

हाड़ा: पिछली बार आप कांग्रेस से ही प्रधान थे। राज्य में सरकार भी कांग्रेस की थी बावजूद इसके कुछ नहीं किया?

- मालवीय: मेरे प्रधान के कार्यकाल में मांडलगढ़ पंचायत समिति को अच्छे काम के लिए प्रदेश में पहला पुरस्कार मिला। सीएम ने मुझे सम्मानित किया था। मुझे उप चुनाव में जो वोट मिले वह मेरे प्रधान के कार्यकाल में कराए काम का ही परिणाम है। असल बात तो यह है कि मुझे जो जनाधार मिला है उसके कारण दोनों पार्टियां बौखलाई हुई हैं।

हाड़ा: मांडलगढ़ में सबसे ज्यादा समय कांग्रेस के विधायक रहे। यहां से सीएम भी रहे फिर भी कोई उपलब्धि नहीं?

- मालवीय: खनन क्षेत्र में नए एग्रीमेंट व एमएल नहीं हो रहे हैं। इससे खनन उद्यमी परेशान हैं। मेरे ऊपर जनता का ऋण है इसलिए मैं अगली बार फिर चुनाव लडूंगा। मुझे किसी पार्टी के टिकट की जरूरत नहीं, क्योंकि जनता मेरे साथ है। 40 हजार वोट मुझे आठ-दस दिन के प्रचार में मिले। पूरा समय मिलता तो परिणाम कुछ और ही होता।

हाड़ा: आप अपनी पार्टी के ही नहीं हुए फिर जनता का क्या होगा?

-मालवीय: उपचुनाव में जनता ने जिसे जिताकर विधायक बनाया अब वे यह कहकर जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकते कि सरकार उनकी नहीं है। सरकार नहीं है, यह तो पहले ही पता था। जब बहाने ही बनाने थे तो फिर चुनाव ही क्यों लड़ा। क्षेत्र की जनता के लिए आंदोलन करना पड़ेगा तो करुंगा क्योंकि विधायक बहाना बना रहे हैं। दूसरी तरफ जिनकी सत्ता है और जिला प्रमुख भी हैं फिर भी उन्हें जनता की चिंता नहीं है।

शक्तिसिंह हाड़ा

शक्तिसिंह हाड़ा जिला प्रमुख हैं। मांडलगढ़ उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी थे। ऐसे में इनकी जिम्मेदारी बनती है कि विकास कार्य कराएं और जनसमस्याओं का निराकरण करें।

गोपाल मालवीय

गोपाल मालवीय कांग्रेस से मांडलगढ़ के प्रधान रह चुके हैं। उपचुनाव में निर्दलीय लड़े थे। ऐसे में जिम्मेदारी बनती है कि क्षेत्र की समस्याओं व जनहित के मुद‌्दों के प्रति सजग रहें व समाधान कराएं।

मालवीय- आपकी सरकार, जिला प्रमुख हैं, तो भी उपचुनाव हारे?

हाड़ा: जनता ने हमें चेताया है, अाप भी तो कांग्रेस से प्रधान रहे, लेकिन कोई उपलब्धि नहीं दिखी

मालवीय: आपकी सरकार है। आप जिला प्रमुख हैं। काफी समय से क्षेत्र में घूम रहे थे फिर भी हार गए?

- हाड़ा: उपचुनाव हारना या जीतना अलग बात है। मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के लिए 100 करोड़ रुपए के काम डीएमएफटी और 500-600 करोड़ रुपए के काम राज्य सरकार ने स्वीकृत किए। इतने काम तो यहां कांग्रेस ने अभी तक के इतिहास में नहीं कराए। उप चुनाव में जनता ने हमें वेकअप कॉल दी है।

मालवीय: क्षेत्र के खनन उद्यमी परेशान हैं। कई प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं?

- हाड़ा: कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में माइनिंग क्षेत्र में सब कुछ बैन कर दिया था। सभी खनन उद्यमी परेशान थे। मुख्यमंत्री ने बजट में घोषणा कर माइनिंग उद्यमियों को राहत दी। उप चुनाव में हमने जो वादा किया था, सरकार ने पूरा किया। इससे सैंड स्टोन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

मालवीय: फिर उप चुनाव क्यों हारे?

- हाड़ा: तात्कालिक समय जो कारण थे वे हार के कारण हो सकते हैं लेकिन हमें जनता का निर्णय स्वीकार है। कांग्रेस 2013 में चुनाव क्यों हारी क्या यह आप बता सकते हैं? जनता ने हमें वेकअप कॉल दी है। जनता शायद बताना चाहती थी कि काम में और सुधार की जरूरत है। हम सुधार कर रहे हैं।

मालवीय: चार साल में भाजपा ने कुछ नहीं किया इसका नतीजा हार है?

-हाड़ा: मुझ से पहले आप मांडलगढ़ में प्रधान रहे। तब जनता परेशान क्यों थी। जिला परिषद के माध्यम से मैंने देवली-मोरड़िया सड़क, खटवाड़ा-जोजवा पुलिया, झालिया-बीलिया पुलिया स्वीकृत कराई। खनिज ट्रस्ट से सलावटिया-तिलस्वा सड़क स्वीकृत कराई। बिजौलिया में कॉलेज खुला। जेतपुरा बांध की मरम्मत के लिए 23 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए। मैं वापस चुनाव लडूंगा या नहीं यह निर्णय संगठन करेगा।

मालवीय: क्षेत्र की जनता पानी के लिए भटकने को मजबूर है?

- हाड़ा: मांडलगढ़ में भाजपा के विधायक बहुत कम बार रहे। क्षेत्र पिछड़ा हुआ है तो इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। अधिकांश बार विधायक कांग्रेस के रहे। यहां तक कि यहां से कांग्रेस से जीते शिवचरण माथुर सीएम रह चुके हैं। आपने प्रधान रहते हुए भी विकास नहीं करवाया। इस समय क्षेत्र में कई काम चल रहे हैं।

विशेष: कांग्रेस के विधायक विवेक धाकड़ ने आमने-सामने में सवाल-जवाब करने से इनकार कर दिया। इसलिए ‘भास्कर’ ने जनवरी में हुए उप चुनाव में कांग्रेस के बागी एवं निर्दलीय चुनाव लड़कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने वाले प्रत्याशी पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय से बातचीत की है।

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