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ये है जवाब- जगदीश ने युवाओं को ऐसे गुर दिए कि ताशकंद में एशियन कुश्ती में 10 में से 6 ने जीते मेडल

3 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा | किसान परिवार में जन्मे जगदीश को बचपन से कुश्ती का शौक था। लोग उन्हें ताने मारते थे- पहलवानी में क्या रखा है...इससे पेट नहीं भरेगा...कोई काम करो। लेकिन जगदीश ने कभी पलटकर जवाब नहीं दिया।

सोमवार को उजबेकिस्तान के ताशकंद में हुई एशियन सब जूनियर ग्रीको रोमन कुश्ती प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने 6 पदक जीते तो पूरा देश झूम उठा। इसका श्रेय मिला कोच जगदीश जाट को। जगदीश खेल परिषद में राजसमंद में कोच हैं। भारतीय कुश्ती संघ ने उन्हें 8 से 14 मई तक हुई इस प्रतियोगिता के लिए कोच नियुक्त किया था।

जगदीश ने फोन पर ‘भास्कर’ से बात की। खुशी जताते हुए कहा कि ताने मारने वलों को अब जवाब मिल गया है। दोनों बड़े भाइयों ने कुश्ती सिखाने में मेहनत की। बड़े भाई रतनलाल जाट वर्तमान में रेलवे में डिप्टी सिटीआई के पद पर उदयपुर में कार्यरत हैं।

खेल समाचार

एक रजत और पांच कांस्य पदक... ताशकंद में हुई प्रतियोगिता में दस पहलवानों ने भाग लिया। इनमें से 6 खिलाड़ियों ने पदक जीते। एक रजत तथा 5 कांस्य पदक भारतीय पहलवानों के नाम रहे। स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का मलाल है। उन्होंने बताया कि हरियाणा के नीतेश कुमार ने 92 किलो में रजत, आर्मी स्पोर्ट्स के लेस राम ने 51 किलो में, विकास कुमार ने 55 किलो में, हरियाणा के विकास कुमार ने 65 किलो में, दिल्ली के दीपक ने 71 किलो में तथा हरियाणा के रवि मलिक ने 80 किलो ग्राम में कांस्य पदक प्राप्त किया।

भीलवाड़ा के जगदीश भारतीय टीम के कोच

जगदीश जाट सफेद टी-शर्ट में भारतीय पहलवानों के साथ।

जगदीश आज सुबह 9 बजे आएंगे... प्रतियोगिता के बाद जगदीश जाट बुधवार सुबह 9 बजे भीलवाड़ा पहुंचेंगे। रेलवे स्टेशन पर खेल प्रेमियों की आेर से स्वागत किया जाएगा। राजस्थान कुश्ती संघ के अध्यक्ष सीपी सिंह भी मौजूद रहेंगे।

बचपन से कोच बनने का सपना था: जाट... सुभाष नगर मलाण निवासी जगदीश के घर में शुरू से कुश्ती का माहौल रहा। दोनों बड़े भाई भी कुश्ती करते थे। जगदीश ने बताया कि बचपन में ही कुश्ती के प्रति रुझान था। तीनों भाई कुश्ती करते तो लोग टोकते थे। बचपन से कुश्ती कोच बनने का सपना था, जो पूरा हो गया है। माता-पिता निरक्षर थे, तो भी उन्होंने कुश्ती छोड़ने के लिए कभी नहीं कहा। उन्हें हमेशा अागे बढ़ने की ही प्रेरणा दी।

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