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तेरापंथी महासभा का संभागीय संस्कार निर्माण शिविर शुरू

3 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा | श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा संस्था भीलवाड़ा के बैनर तले जयपुर-उदयपुर संभाग का पांच दिवसीय संस्कार निर्माण शिविर बुधवार को हुआ। इसमें 13 से 19 वर्ष के करीब 100 बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। शिविर सुबह पांच बजे ही शुरू हो गया। योग गुरु महावीर गांग ने फिटनेस के गुर बताए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुनि सुखलाल ने कहा कि वह समाज दूरदर्शी होता है जो आने वाली पीढ़ी को चरित्रनिष्ठ बनाता है। शिविर की सिद्धि इसी से है कि बच्चे अपना अच्छा-बुरा स्वयं सोचना शुरू करें। मुनि सुरेशकुमार “हरनावा’ ने कहा कि शिविर में सीखकर बच्चे चाहें तो अपनी हाथों की लकीरों को बदल सकते हैं। बशर्ते सम्यक दिशा में पुरुषार्थ हो। मुनि मोहजीतकुमार ने भी विचार रखे। शिविर निदेशक मुनि संबोध कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि जयेशकुमार ने “हमें मंजिल को पाना है...’ गीत के साथ हुआ। मुख्य वक्ता आरसीएम के चेयरमैन टीसी छाबड़ा थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे महंगी कार संस्कार हैं। इसमें कभी हादसे नहीं होते। स्वागत सभाध्यक्ष भैरूलाल चौरड़िया ने किया जबकि आभार उपाध्यक्ष जसराज चोरड़िया ने ज्ञापित किया।

दूसरा सत्र: बाबूलाल बोहरा ने ‘लर्न बाय फन’ में खेलों के माध्यम से जीवन बेहतर जीने की प्रेरणा दी।

तीसरा सत्र: मोटिवेटर अनिल चौधरी ने ‘हाउ टू बी वर्सटाइल’ विषय पर कहा कि सिर्फ परीक्षा में 95% की उपलब्धि बड़ी कंपनी में बड़ा पद नहीं दिला सकती। पढ़ाई के साथ हर पहलू में परफेक्ट होना होगा।

चौथा सत्र: ब्रेन साइंटिस्ट व मोटिवेशनल स्पीकर नवीन अग्रवाल ने ‘एेसे बनें जीरो से हीरो’ विषय पर कहा कि 2-4 लोगों से लड़कर जीत जाने से कोइ हीरो नहीं बन जाता। हीरो बनने वाले एक बात पर यकीन करते हैं कि वे शुरू कहीं से भी करें जीत पर सिर्फ उनका कब्जा होता है।

पांचवा सत्र: साइंस एक्टिविस्ट दिपांशु सेखानी ने ‘फन साइंस’ विषय पर बताया कि साइंस कोई नया आविष्कार नहीं है। यह हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है।

भीलवाड़ा | श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा संस्था भीलवाड़ा के बैनर तले जयपुर-उदयपुर संभाग का पांच दिवसीय संस्कार निर्माण शिविर बुधवार को हुआ। इसमें 13 से 19 वर्ष के करीब 100 बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। शिविर सुबह पांच बजे ही शुरू हो गया। योग गुरु महावीर गांग ने फिटनेस के गुर बताए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुनि सुखलाल ने कहा कि वह समाज दूरदर्शी होता है जो आने वाली पीढ़ी को चरित्रनिष्ठ बनाता है। शिविर की सिद्धि इसी से है कि बच्चे अपना अच्छा-बुरा स्वयं सोचना शुरू करें। मुनि सुरेशकुमार “हरनावा’ ने कहा कि शिविर में सीखकर बच्चे चाहें तो अपनी हाथों की लकीरों को बदल सकते हैं। बशर्ते सम्यक दिशा में पुरुषार्थ हो। मुनि मोहजीतकुमार ने भी विचार रखे। शिविर निदेशक मुनि संबोध कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि जयेशकुमार ने “हमें मंजिल को पाना है...’ गीत के साथ हुआ। मुख्य वक्ता आरसीएम के चेयरमैन टीसी छाबड़ा थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे महंगी कार संस्कार हैं। इसमें कभी हादसे नहीं होते। स्वागत सभाध्यक्ष भैरूलाल चौरड़िया ने किया जबकि आभार उपाध्यक्ष जसराज चोरड़िया ने ज्ञापित किया।

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