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बिजौलिया कॉलेज: पांच महीने में साढ़े 37 बीघा जमीन आबंटित की बनेड़ा कॉलेज: 15 दिन पहले जमीन 60 से घटाकर 24 बीघा कर दी

3 वर्ष पहले
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राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर दांवपेंच अभी से शुरू हो गए हैं। उपचुनाव में भी राजनीतिक दलों ने सियासी समीकरण बिठाने के प्रयास किए थे। मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा हार गई। दिसंबर में होने वाले चुनाव में कोई रिस्क न रहे। इसलिए कवायद शुरू हो गई है।

पहले डीएमएफटी के बजट का काफी हिस्सा वहीं खर्च किया था और अब उच्च शिक्षा में भी देखने को मिल रहा है। बनेड़ा कॉलेज को खुले एक साल हो गया है, लेकिन जमीन का पट्टा अभी तक नहीं बना है। जमीन भी 15 दिन पहले ही अलॉट हुई है। उधर, बिजौलिया कॉलेज की घोषणा उपचुनाव के दौरान की गई। पांच महीने के दौरान ही वहां के लिए बजट देने के संबंध में पत्र जारी हो गया। आयुक्तालय से कहा गया है कि पीडब्ल्यूडी से अनुमानित नक्शा भिजवाएं ताकि 6 करोड़ रुपए के बजट को स्वीकृत किया जा सके। ऐसे में नोडल अधिकारी प्रो. बीएल मालवीय ने मांडलगढ़ एक्सईएन को पत्र लिखकर कॉलेज का नक्शा जल्दी बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। ताकि आयुक्तालय भेजा जा सके।

बाद में घोषणा वाले बिजौलिया कॉलेज को 6 करोड़ रुपए देने की भी तैयारी

बिजौलिया कॉलेज के लिए साढ़े 37 बीघा जमीन कस्बे के बाहर आबादी क्षेत्र से 250 मीटर दूर शक्करगढ़-गुढ़ा स्टेट हाईवे पर चिह्नित की गई है। जमीन का पट्टा अलॉट हो चुका है। कॉलेज जिस इमारत में अस्थाई रूप से शुरू होगा उसका भी चयन कर लिया गया है। संकाय का निर्धारण हो चुका है। इधर, बनेड़ा कॉलेज के लिए 60 बीघा जमीन का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। लेकिन राजस्व विभाग की ओर से लंबे वक्त तक अनुमति नहीं दी गई। बाद में चलकर 60 बीघा के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। 24 बीघा जमीन की स्वीकृति मिली है।

हमारे पास आयुक्तालय का पत्र आया है, जिसमें निर्देश दिया गया कि बिजौलिया कॉलेज के लिए पीडब्ल्यूडी से नक्शा बनवाएं। फिर आयुक्तालय भिजवाएं ताकि 6 करोड़ रुपए का बजट भेजा जा सके। प्रो. बीएल मालवीय, नोडल अधिकारी, बिजौलिया कॉलेज

60 से घटाकर जमीन 24 बीघा करके अब अलॉट की है। जमीन का पट्टा मिलना बाकी है। कॉलेज में एडमिशन प्रक्रिया सही से संचालित हो इसके लिए फैकल्टी लगाने को लेकर तीन लेटर लिख चुके हैं। डॉ. एसएस श्रीमाल, प्राचार्य, बनेड़ा कॉलेज

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर दांवपेंच अभी से शुरू हो गए हैं। उपचुनाव में भी राजनीतिक दलों ने सियासी समीकरण बिठाने के प्रयास किए थे। मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा हार गई। दिसंबर में होने वाले चुनाव में कोई रिस्क न रहे। इसलिए कवायद शुरू हो गई है।

पहले डीएमएफटी के बजट का काफी हिस्सा वहीं खर्च किया था और अब उच्च शिक्षा में भी देखने को मिल रहा है। बनेड़ा कॉलेज को खुले एक साल हो गया है, लेकिन जमीन का पट्टा अभी तक नहीं बना है। जमीन भी 15 दिन पहले ही अलॉट हुई है। उधर, बिजौलिया कॉलेज की घोषणा उपचुनाव के दौरान की गई। पांच महीने के दौरान ही वहां के लिए बजट देने के संबंध में पत्र जारी हो गया। आयुक्तालय से कहा गया है कि पीडब्ल्यूडी से अनुमानित नक्शा भिजवाएं ताकि 6 करोड़ रुपए के बजट को स्वीकृत किया जा सके। ऐसे में नोडल अधिकारी प्रो. बीएल मालवीय ने मांडलगढ़ एक्सईएन को पत्र लिखकर कॉलेज का नक्शा जल्दी बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। ताकि आयुक्तालय भेजा जा सके।

उपचुनाव के दौरान लगे सात व्याख्याता, अब उनमें से एक भी नहीं... उपचुनाव से पहले सात व्याख्याताओं को लगाने के आदेश हुए थे। लेकिन इनमें से अब एक भी व्याख्याता कार्यरत नहीं है। यह जरूर है कि आरपीएससी की ओर से एक व्याख्याता स्थाई रूप से लगाया गया है।

सरकारी गफलत के चलते देर से शुरू हुए थे एडमिशन... बनेड़ा क्षेत्र में हुए सर्वे के मुताबिक यहां के कॉलेज के लिए कला संकाय खोला जाना था। लेकिन वाणिज्य संकाय शुरू करने की सहमति आई थी। जिसके चलते प्रवेश के लिए दस फीसदी स्टूडेंट्स ने भी आवेदन नहीं किया। बाद में गलती का सुधार करते हुए। कला संकाय शुरू किया गया। इसके चलते 15 अगस्त बाद शैक्षणिक सत्र शुरू हो सका।

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