समाज के रूढ़ीवाद को बयां करती हैं प्रियल की कला
चारकोल पेटिंग से प्राकृतिक सौंदर्य और समाज में नारी की स्थिति शहर की उभरती कलाकार प्रियल कोठारी ने बताई है। फैशन डिजाइनिंग में स्नातक प्रियल कहती हैं कि पेंटिंग से वे समाज के रूढ़ीवाद और नारी की दयनीय दशा बताना चाहती हैं। उनकी कला बताती है कि किस तरह अलग-अलग बंदिशों में एक नारी या बालिका जकड़ी होती है।
प्रकृति सौंदर्य और स्त्रियों की एकरूपता को भी इसमें दर्शाया है। पेंटिंग को ऐसे तरीके और रूप में दर्शाना चाहती हैं कि वर्तमान की जटिल हालात पर कटाक्ष हो सके। उनकी बनाई एक चारकोल पेंटिंग को गौर से देखने पर समाज का नारी के प्रति नजरिया और तमाम उलझनों का ऐसा जाल सामने आता है जिससे बच निकलना आम भारतीय नारी के लिए मुश्किल हो जाता है। प्रियल कोठारी का कहना है कि आर्ट में ही उन्हें अपना कॅरिअर बनाना है। इसके लिए परिवार ने खूब सपोर्ट किया।
शहर की उभरती कलाकार चारकोल पेंटिंग से दे रही संदेश
भास्कर संवाददाता|भीलवाड़ा
चारकोल पेटिंग से प्राकृतिक सौंदर्य और समाज में नारी की स्थिति शहर की उभरती कलाकार प्रियल कोठारी ने बताई है। फैशन डिजाइनिंग में स्नातक प्रियल कहती हैं कि पेंटिंग से वे समाज के रूढ़ीवाद और नारी की दयनीय दशा बताना चाहती हैं। उनकी कला बताती है कि किस तरह अलग-अलग बंदिशों में एक नारी या बालिका जकड़ी होती है।
प्रकृति सौंदर्य और स्त्रियों की एकरूपता को भी इसमें दर्शाया है। पेंटिंग को ऐसे तरीके और रूप में दर्शाना चाहती हैं कि वर्तमान की जटिल हालात पर कटाक्ष हो सके। उनकी बनाई एक चारकोल पेंटिंग को गौर से देखने पर समाज का नारी के प्रति नजरिया और तमाम उलझनों का ऐसा जाल सामने आता है जिससे बच निकलना आम भारतीय नारी के लिए मुश्किल हो जाता है। प्रियल कोठारी का कहना है कि आर्ट में ही उन्हें अपना कॅरिअर बनाना है। इसके लिए परिवार ने खूब सपोर्ट किया।
इस तरह बनाई चारकोल पेंटिंग... प्रियल ने बताया कि साधारण पेंटिंग की जगह चारकोल पेंटिंग को चुना। ताकि मेरी आर्ट और निखरकर सामने आ सके। तीन दिन की मेहनत से यह पेंटिंग बन पाई है। सबसे पहले पेज पर पेंसिल से आउटलाइन बनाई। फिर पेन से मार्किंग की। इसके बाद चारकोल से शेड्स बनाकर इसे पूरा किया है।