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महिला टीचर्स को शौचालयों के सामने नहाना पड़ रहा है 36 घंटे तक चालू थे सोने वाले कमरों में सीसीटीवी कैमरे

3 वर्ष पहले
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सुवाणा के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में चल रहे सेकंड ग्रेड शिक्षक आवासीय प्रशिक्षण शिविर में शर्मनाक स्थिति सामने आई है। शिविर में शामिल 25 महिला टीचरों को शौचालयों के सामने नहाना पड़ रहा है। क्योंकि परिसर में बाथरूम नहीं हैं। एक और चिंताजनक खुलासा हुआ है कि इनके साेने वाले कमरों में शिविर शुरू होने के बाद 36 घंटे तक सीसीटीवी कैमरे चालू थे। हंगामा हुआ तो भी शिविर प्रबंधकों ने कैमरे नहीं हटाए।

आखिरकार शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारियों ने इन्हें हटाया। पूरे मामले को लेकर शिक्षक संगठनों ने इसे महिला शिक्षकों की निजता का हनन बताते हुए बड़े अधिकारियों से जांच करवाने की मांग की है। सीसीटीवी पर हुए विवाद के बाद भास्कर टीम ने पूरे मामले की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि मॉडल स्कूल में जहां महिला शिक्षिकाओं काे ठहराया गया, उन कमरों में सीसीटीवी चलते रहे। शिविर शुरू होने के दूसरे दिन शाम को अचानक शिक्षिकाओं की नजर सीसीटीवी कैमरों पर गई तो वे चौंक गई। तुरंत सभी शिक्षिकाएं शिविर प्रभारी अशोक श्रोत्रिय से मिली।

आैिचत्य... जिन्होंने स्टाफ को कहकर कैमरों पर कागज व टेप लगवाई। लेकिन लगभग दो दिन तक महिला कक्ष में सीसीटीवी कैमरे चलने की बात सामने आई है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए रमसा निदेशक को शिकायत की है। शिविरार्थियों ने बताया कि उन्हें सुबह 10 से शाम 5:30 बजे तक अध्यापन करवाया जा रहा है। इसके बाद उनके लिए कोई काम नहीं है। तो फिर शिविर को आवासीय करने का औचित्य क्या है। उन्होंने बताया कि इस बार जिला तो दूर मंडल तक बदल दिया है। जबकि शिविर केवल जिले में ही गैर आवासीय आयोजित किए जाने चाहिए। ताकि शिक्षक मन लगाकर कुछ बात सीख सके। शनिवार दोपहर जिले के सभी शिक्षा अधिकारियों ने शिविर का दौरा करके शिविरार्थियों से वार्ता की।

नहाने का पानी भी वॉशबेसिन से ड्रम-बाल्टी में भरा जाता है।

हद | पहले ही दिन बता दिया था कैमरों के बारे में

शर्मनाक : शौचालयों के बाहर लिख दिया महिला स्नानघर, पुरुष शिक्षक नहाते हैं सामने खुले में... महिला संभागियों ने बताया कि अधिकारियों ने महिला शिक्षकों की सुविधाओं को नजरअंदाज कर शिविर स्थल तय कर दिया है। महिला शिक्षकों को शौचालय परिसर में ही नहाना पड़ रहा है। यही नहीं लगातार तीन दिन तक नहाने के लिए पानी भी वाॅशबेसिन से ही लेना पड़ा। इनका कहना है कि हमारे लिए शर्मसार करने वाली बात ये है कि इन शौचालयों पर महिला स्नानघर लिख दिया है। वहीं शिविर में आए अन्य शिक्षकों के लिए मॉडल स्कूल कैंपस में खुले में टोटियां लगा दी। चिंताजनक बात ये है कि ये खुले में नहाते हैं और इसी परिसर में 22 महिला शिक्षक रह रही हैं। इसका भी कई शिक्षकों ने शिविर प्रभारी के समक्ष एतराज जताया।

...और जली और सूखी रोटी परोसी जा रही शिविर में... संभागियों ने बताया कि भोजन भी गुणवत्ता वाला नहीं है। सब्जी-दाल क्वालिटी के नहीं हैं। सूखी व जली हुई रोटियां देने का भी आरोप लगाया है। संभागियों ने बताया कि 18 मई सुबह मीनू के अनुसार, मीठा दलिया नमकीन आइटम दिया जाना था, लेकिन नमकीन आइटम नहीं दिया गया। इसकी शिकायत संभागियों ने जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार व रमसा एडीपीसी योगेश पारीक को दी। सूचना मिलने पर एडीपीसी पारीक शिविर स्थल पहुंचे।

सभी कमरों से कैमरे हटवा दिए हैं। भोजन व्यवस्था के ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण एवं मीनू अनुसार भोजन देने को पाबंद किया। योगेश पारीक, एडीपीसी, रमसा

10 दिवसीय शिविर का फैक्ट

16 मई से शुरू होकर 25 को होगा समापन

उदयपुर जिले के संभागी

विषय-अंग्रेजी व एसएसटी

लापरवाही : 16 मई को शिविर प्रभारी को जानकारी दी फिर भी दूसरे दिन कैमरों की पावर लाइट चालू थी... शिविर में शामिल महिला शिक्षकों का कहना है कि 16 मई को ही मौखिक रूप से शिविर प्रभारी को सीसीटीवी के बारे में बता दिया था। इस पर हमें जवाब मिला कि सीसीटीवी कैमरे से ही बंद हैं। यह बात हमने मान ली, लेकिन 17 मई को जब कुछ शिक्षिकाओं की नजर कैमरों पर गई तो पावर की लाइट जल रही थी। इस पर चिंता हुई और हंगामा करना पड़ा। इसके बावजूद दिनभर यही तर्क दिया जाता रहा कि कैमरों पर टेप चिपका दी। लेकिन हमारा ऐतराज था कि टेप लगातार कैसे चिपकी रह सकती है? आखिरकार शिक्षक संगठनों के नेताओं ने कैमरे हटाए।

शिविर में 30 पुरुष व 25 महिला संभागी है

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