जयपुर | चुनावी साल में पानी का मुद्दा सरकार के लिए मुसीबत नहीं बने इसके लिए पानी से जुड़े प्रोजेक्ट को तेजी से निपटाया जा रहा है। पिछले चार सालों में सरकार 36 से ज्यादा छोटे और बड़े पेयजल प्रोजेक्ट पूरे कर चुकी है। इसके 30 शहरों में एक करोड़ से ज्यादा लोग पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट से जुड़ गए हैं। बड़े प्रोजेक्ट में चंबल-भीलवाड़ा पेयजल परियोजना, नागौर लिफ्ट परियोजना, 2654 फ्लोराइड प्रभावित गांवों में 2575 आरओ प्लांट शामिल है। इन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सरकार करीब 18 हजार करोड़ रुपए खर्च चुकी है। इनके अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप रिपेयर करने के लिए अप्रेल से बड़ा अभियान शुरू किया जा चुका है। पिछले सप्ताह तक इस अभियान के जरिए शहरों में 3805 और ग्रामीण क्षेत्रों में 22553 हैंडपंपों की मरम्मत की जा चुकी है। हालांकि अभी लगभग 20 हजार हैंडपंप खराब हैं। ये 30 शहर पेयजल पाइपलाइन से जुड़े: करीब 30 से ज्यादा शहरों को सतही पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट से जोड़ा जा चुका है। इनमें जोधपुर में पीपाड़, बिलाड़ा, बाड़मेर में समदड़ी, पाली में तखतगढ़, जैतारण, जैसलमेर में पोकरण, जालौर में सांचोर और जालौर शहर, चूरू में राजगढ़ छापर एवं सुजानगढ़, झालावाड़ में भवानी मंडी एवं सुनेल, नागौर में मुडवा, कुचेरा, टोंक में देवली, उनियारा, जयपुर में किशनगढ़, रेनवाल और जोबनेर, भीलवाड़ा, अंता, मारवाड़, झुंझुनू, टोंक, खेतड़ी, मंडावा, बगड़, गोठड़ा के अलावा 8051 गांव और ढाणियों की एक करोड़ से ज्यादा आबादी को पेयजल सप्लाई से जोड़ा जा चुका है।