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पानी बचाना है तो वित्त या समय प्रबंधन की तरह हो जल प्रबंधन

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

भास्कर के जल मित्र अभियान के तहत कुमुद विहार में शुक्रवार शाम भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) की ओर से विचार गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने जल संरक्षण व संवर्धन के लिए मानसिकता बदलने, वित्त व समय प्रबंधन की तरह जल प्रबंधन की भी जरूरत बताई।

अध्यक्षता ‘इंटेक’ के संरक्षक व उद्योगपति तिलोकचंद छाबड़ा ने की। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के साथ ही छोटे-छोटे उपायों को अमल में लाना होगा। संस्थान के डीडी देराश्री ने कहा कि पानी का अपव्यय रोकने के लिए सरकार भी काम कर रही, लेकिन स्थिति नहीं बदल रही। दरअसल, इसके लिए लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। चंबल का पानी आने से अब आरओ की जरूरत नहीं है। ककरोलिया का पानी उद्योगों को दिया जाए तो नदी, कुओं का दोहन रुकेगा। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता रहे ओपी हिंगड़ ने कहा कि दुनिया में पानी तो बहुत है, लेकिन उसका एक प्रतिशत ही मानव उपयोग ले सकता है। इसका भी सिर्फ 0.1 प्रतिशत पीने लायक है। इसलिए पीने का पानी बचाना ही होगा। संस्थान के ही बलवंत कुमार ने कहा कि समय की तरह पानी का प्रबंधन करना सीखना होगा। चार दिन में पानी आता था तब भी घरों में लोग पीने और नहाते ही थे। तब रोज पानी देने की क्या आवश्यकता है? सीए दिलीप गोयल व मनोहरलाल लखारा ने भी पानी का अपव्यय रोकने पर विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हम पानी नहीं बचा सके तो हम भी नहीं बचेंगे। पानी बचाना जन-जन का काम है।

पानी दूर से लाना पड़ता था समझते थे बूंद-बूंद की कीमत

भास्कर जलमित्र अभियान के तहत इंटेक की ओर से संगोष्टि में बोलते उद्यमी त्रिलोकचंद छाबड़ा।

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

भास्कर के जल मित्र अभियान के तहत कुमुद विहार में शुक्रवार शाम भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) की ओर से विचार गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने जल संरक्षण व संवर्धन के लिए मानसिकता बदलने, वित्त व समय प्रबंधन की तरह जल प्रबंधन की भी जरूरत बताई।

अध्यक्षता ‘इंटेक’ के संरक्षक व उद्योगपति तिलोकचंद छाबड़ा ने की। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के साथ ही छोटे-छोटे उपायों को अमल में लाना होगा। संस्थान के डीडी देराश्री ने कहा कि पानी का अपव्यय रोकने के लिए सरकार भी काम कर रही, लेकिन स्थिति नहीं बदल रही। दरअसल, इसके लिए लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। चंबल का पानी आने से अब आरओ की जरूरत नहीं है। ककरोलिया का पानी उद्योगों को दिया जाए तो नदी, कुओं का दोहन रुकेगा। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता रहे ओपी हिंगड़ ने कहा कि दुनिया में पानी तो बहुत है, लेकिन उसका एक प्रतिशत ही मानव उपयोग ले सकता है। इसका भी सिर्फ 0.1 प्रतिशत पीने लायक है। इसलिए पीने का पानी बचाना ही होगा। संस्थान के ही बलवंत कुमार ने कहा कि समय की तरह पानी का प्रबंधन करना सीखना होगा। चार दिन में पानी आता था तब भी घरों में लोग पीने और नहाते ही थे। तब रोज पानी देने की क्या आवश्यकता है? सीए दिलीप गोयल व मनोहरलाल लखारा ने भी पानी का अपव्यय रोकने पर विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हम पानी नहीं बचा सके तो हम भी नहीं बचेंगे। पानी बचाना जन-जन का काम है।

जनसंपर्क विभाग के पूर्व उपनिदेशक श्यामसुंदर जोशी ने कहा कि स्वच्छता अभियान की तरह पानी को बचाने के लिए भी प्रेरित करने की जरूरत है। आर्टिस्ट ओमप्रकाश सोनी ने कहा कि कुछ कानून ही पानी की समस्या को बढ़ा रहे है। विकसित देशों में आप पानी का अपव्यय नहीं कर सकते। जबकि वहां पानी की कमी नहीं है। इंजीनियर रतन दरगड़ ने कहा कि आरओ के पानी पर निर्भरता छोड़नी होगी। मेहमान को आधा गिलास पानी की जरूरत है, तो उतना ही दें। विद्यासागर सुराणा ने कहा कि पानी की कीमत गांव के लोग जानते हैं। उन्हें दूर से पानी लाना पड़ता है। शहर में तो नल खोलते ही पानी मिलता है, इसलिए सदुपयोग करना भूल गए। गोपाल नराणीवाल व अजयकुमार ने कहा कि खुले नलों पर टोंटियां लगाएं एवं लाइन में लीकेज ठीक हों।

27 को जल प्रबंधन पर सेमीनार ... कुमुद विहार विकास समिति के अध्यक्ष सुरेश माहेश्वरी ने बताया कि 27 मई को सेमीनार होगी। इसमें कॉलोनी के बाशिंदे अपने घरों में जल प्रबंधन के उपायों को साझा करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस कॉलोनी के प्रत्येक घर में वाटर हार्वेस्टिंग लगाना अनिवार्य किया हुआ है। किसी मकान का बरसाती पानी बहकर व्यर्थ नहीं होता है।

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