भीलवाड़ा|सूरज जब भी डूबा हैं पश्चिम में ही डूबा हैं, संस्कार जब भी गिरे हैं तो पश्चिमी हवाओं के थपेड़े खाकर ही गिरे हैं। जिनमें अच्छी आदतों की तादाद ज्यादा होती हैं उन्हें पूरी कायनात प्यार करती है। यह बात मुनि संबोध कुमार ने तेरापंथी महासभा के निर्देशन व तेरापंथ सभा संस्था की ओर से आयोजित पंच दिवसीय संस्कार निर्माण शिविर के तीसरे दिन हमारी संस्कृति-हमारे संस्कार विषय पर पहले सत्र में कही। द्वितीय सत्र में रीना मेड़तवाल ने बच्चों को बर्थडे कार्ड में किंग आर्ट का प्रशिक्षण दिया। तृतीय सत्र में हिमांशु परिहार, चतुर्थ सत्र में प्रकाशचंद्र तांतेड़ ने प्रशिक्षण दिया।