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सूर्य का मेष में प्रवेश आज से शक संवत 1940 की शुरुआत

3 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा | सूर्य ने शनिवार को मेष (निरयन) राशि में प्रवेश कर लिया। इसके साथ ही सूर्य संक्रांति का मीन मॉस समाप्त हो गया। कुछ लोग भ्रांतिवश इसे मल मॉस कहते हैं। वास्तव में यह मल मास नहीं है। मल मास तो अतिरिक्त मास होता है। यानि अधिक मास को मल मास कहा जाता है, जो इस बार ज्येष्ठ में है।

ज्योतिष हरीशचंद शर्मा के अनुसार सूर्य संक्रांति, विशेषकर मेष संक्रांति का महत्व है। वर्ष का प्रारंभ मेष संक्रांति से किया जाता है। शक संवत उसीके अनुसार अपना वर्ष बदलता है। शक 1940 सोमवार 15 अप्रेल के सूर्योदय से माना जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय कलैंडर में इसे सायन पद्धति के अनुसार 22 मार्च से माना गया है। ज्योतिष गणित में इसे अब्दप वर्ष का प्रारंभ काल अर्थात सोमवार दोपहर 12.14 बजे से वर्ष का प्रारंभ मानकर ही अहर्गण की गणना की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष प्रारंभ समय से अगले सूर्योदय तक का समय पहले उज्जैन के सूर्योदय से यह गणना होती थी। स्थान विशेष के सूर्योदय को लेकर उस स्थान के ग्रहों की गणना के लिए अहर्गण की गणना की जा सकती है। भारत के अनेक प्रांतों में नव वर्ष मेष संक्रांति से मनाया जाता है। अथवा इसे विशेष दिन के रूप में माना जाता है। जैसे, पंजाब में वैशाखी के रूप में, बंगाल में कड़कपूजा, उड़ीसा में मेष संक्रांति के रूप में, केरल में विषु मास या नव वर्ष सिंह संक्रांति (चिंगम) से मनाया जाता है। तमिलनाडु एवं बंगाल में मेषादि मास प्रारंभ, मणिपुर में चिरोबा आदि के रूप में मेष संक्रांति मनाई जाती है।

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