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छह माह से बंद पानी के टैंक को साफ करने उतरा युवक फंसा दो पड़ोसी मदद को उतरे...मिथेन गैस से दम घुटा, तीनों की मौत

3 वर्ष पहले
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एक के बाद एक मोहल्ले के तीन युवकों के टैंक में फंसने की जानकारी मोहल्ला वासियों को हुई तो मौके पर भीड़ जमा हो गई। पड़ोसी पहुंचे और कुछ युवकों ने कपड़ा आदि बांधकर अंदर उतरे व तीनों को बाहर निकाल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तीनों मृत घोषित कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि मौत के पीछे प्रथम दृष्टया घर में पानी का टैंक व सेप्टिक टैंक पास-पास होने से लीकेज से पहुंचा गंदा पानी सड़ गया। इससे बनी मिथेन गैस से दम घुट गया। सीओ सिटी राजेश मीणा, कोतवाल विवेक सिंह, पुर एसएचओ गजेंद्रसिंह मौके पर पहुंचे।

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

मानसरोवर झील के पीछे पटेलनगर सेक्टर नौ में घर में बने पानी के टैंक में उतरे तीन लोगों की मौत हो गई। मकान मालिक युवक टैंक की सफाई करने उतरा था। काफी देर तक नहीं निकला तब दो पड़ोसी अंदर गए वे भी बाहर नहीं आए तो आसपास के लोगों ने तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। टैंक छह महीने से बंद था। मौत का कारण प्रथम दृष्टया टैंक में जहरीली गैस बनना माना जा रहा है। क्योंकि बगल में ही सेप्टिक टैंक भी है।

एसएचओ नवनीत व्यास ने बताया कि सोमवार शाम पटेलनगर सेक्टर नौ में रहने वाला बीड़ी सेल्समेन मुकेश (35) पुत्र सुधीर माहेश्वरी के घर का पानी का टैंक करीब छह माह से बंद था। रात करीब आठ बजे वह नल से पर्याप्त पानी आने पर टैंक की सफाई करने के लिए ढक्कन खोल कर अंदर उतरा। करीब 15 मिनट तक नहीं निकला तो उसकी प|ी चिल्लाई। आवाज सुनकर पड़ोसी विनोद (22) पुत्र कैलाश पाराशर मुकेश को बचाने के लिए टैंक में गया, जो भी बाहर नहीं आया तो मुकेश के घर में मौजूद प|ी व दो बच्चों ने हल्ला मचाया तो पास ही रहने वाला श्यामलाल (40) पुत्र मदनलाल टेलर आया और वह भी उतरने के बाद बाहर नहीं आया।

भास्कर ने रात को ही जानी मौत की वजह... पानी व सेप्टिक टैंक पास में, अपशिष्ट से बनी मिथेन गैस, इसलिए एक के बाद एक टैंक में उतरे तीनों की ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत... बाद वाले प्रभावित नहीं हुए क्योंकि टैंक खुलने से गैस का असर कम हो गया

पानी में अपशिष्ट के कारण बनी मिथेन गैस मौत की सबसे बड़ी वजह... मुकेश के घर में पानी व सेप्टिक टैंक दोनों पास-पास बने हैं। एक्सपर्ट की माने तो लीकेज के कारण पानी के टैंक में सेप्टिक टैंक का गंदा पानी जमा होता रहा। 6 महीनों से टैंक बंद पड़ा होने से मिथेन गैस बन गई। ये गैस जहरीली होती है। जब तीनों टैंक में उतरे तो जहरीली गैस की चपेट में आने से दम घुट गया और उनकी मौत हो गई।

ऐसे बनती है मिथेन गैस... एक्सपर्ट के मुताबिक पानी और सेप्टिक टैंक सटे हुए हैं। सेप्टिक टैंक में से निकला गंदा पानी लीक होकर पानी के टैंक में जा रहा था। लगातार लीकेज और पानी का टैंक बंद होने से पानी सड़ता गया। इस वजह से मिथेन गैस बन गई।

दम घुटने की वजह, ऑक्सीजन नहीं मिलना... विशेषज्ञों का कहना है कि जिस टैंक में तीनों उतरे थे, उसमें एक व्यक्ति भी आसानी से उतर नहीं सकता, लेकिन तीनों इस टैंक में उतरे। उनका दम घुट गया। क्योंकि गंदा पानी सड़ता है, ऐसे में ऑक्सीजन की कमी होती रहती है। यहां बंद टैंक में ऑक्सीजन ही नहीं मिली।

फिर लोग कपड़ा मुंह पर बांधकर टैंक में उतरे

इस टैंक में उतरे थे तीनों युवक

इस टैंक के पास ही है सेफ्टी टैंक जिससे लीकेज के कारण गैस बनी

टैंक मालिक मुकेश माहेश्वरी बीड़ी का सेल्समेन था और उसके दो बच्चे हैं। प|ी गर्भवती है। पुलिस ने फिलहाल टैंक व घर को सीज कर दिया है। प|ी व बच्चों को पड़ोसियों के यहां रखा गया है।

दूसरा पड़ोसी, विनोद पाराशर के बारे में बताया गया कि वह अविवाहित था तथा छोटे-मोटे काम करने के साथ ही पढ़ाई करता था। वह बाहर से घर लौटा ही था। इसी दौरान चिल्लाने की आवाज सुनकर मदद के लिए गया, लेकिन बाहर नहीं आया।

तीसरा पड़ोसी श्यामलाल टेलर मुकेश के बाद गए विनोद के भी टैंक से बाहर नहीं निकलने पर अपना काम छोड़ कर मौके पर पहुंचा तथा टैंक में उतरा, जो भी वापस नहीं निकला। वह सिलाई कार्य करता था।

टैंक के पास खतरनाक बदबू आ रही थी... भास्कर टीम जब मुकेश माहेश्वरी के घर रात को पहुंची तो पुलिस व पड़ोसियों ने बताया कि टैंक के पास खड़ा होने में भी परेशानी हो रही थी। गैस की बदबू आने से मुंह व नाक पर हाथ रखना पड़ रहा था। फिलहाल पुलिस ने टैंक को सीज कर दिया है।

भास्कर एक्सपर्ट... अगर टैंक ज्यादा समय से बंद है तो सफाई करने से पहले कुछ देर खुला रखें ताकि जहरीली गैस बाहर निकल सके... विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में कई मकानों में पानी के टैंक लंबे समय से साफ नहीं होते। अगर इनकी सफाई करनी हो तो टैंक को काफी देर तक खुला रखें ताकि जहरीली गैस बाहर निकल सके। अगर टैंक ज्यादा गहरा है तो अॉक्सीजन के मास्क लगाकर ही उतरे ताकि जहरीली गैस के दुष्प्रभाव से बचा जा सके।

सिद्धार्थ टांक एक्सईएन चंबल प्रोजेक्ट

डॉ. पदम मीणा एमडी, पीएमआर

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