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लादू छह बार बबलू से हारे, उसे हराने तक शादी नहीं करने का संकल्प लिया, रविवार को हराकर कुमार का खिताब जीता और अब शादी तय की

3 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा | उदयपुर में हुई राजस्थान-मध्यप्रदेश केसरी, कुमार, किशोर, कुमारी व बसंत दंगल में भीलवाड़ा के पहलवानों का दबदबा रहा। भीलवाड़ा के पहलवानों ने पांच में से तीन खिताब अपने नाम किए। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों मुकाबलों में भीलवाड़ा के पहलवानों का यहीं के पहलवानों से मुकाबला हुआ। यानी फाइनल में दोनों पहलवान भीलवाड़ा जिले के ही थे। पुर के निर्मल विश्नोई ने पुर के ही सुनील विश्नोई को हराकर किशोर का खिताब जीता। भीलवाड़ा के लादूलाल जाट ने भीलवाड़ा के ही बबलू गुर्जर को हराकर कुमार और मनीषा माली ने अपनी दोस्त और यहीं की अंजली साहू को हराकर कुमारी का खिताब अपने नाम किया।

एक्सपर्ट व्यू

यहां अखाड़ों में रोज अभ्यास करने वालों में गजब की फुर्ती है। इसी कारण तो देशभर में भीलवाड़ा का नाम है। लेकिन यह सब अखाड़ों के स्तर से ही हो रहा है। इसमें सरकार का कोई सहयोग नहीं है। अभी तो 12 में से केवल तीन अखाड़ों में ही मेट की व्यवस्था है। भीलवाड़ा के पहलवानों ने जिस तरह देश में नाम कमाया उसके लिए तो यहां एकेडमी खुलनी चाहिए। अच्छे पहलवानों को इसमें जाने का अवसर मिले और इनका खर्च सरकार उठाए। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यहां से इंडिया के लिए खेलने वाले पहलवान तैयार होंगे। तेजेंद्र गुर्जर, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान कुश्ती संघ

पैसा नहीं था इसलिए पुर से रोज दौड़कर भीलवाड़ा अखाड़े आते थे, ‘दंगल’ में आमिर के साथ भी दिखे

दंगल में किशोर का खिताब जीतने वाले पुर निवासी निर्मल विश्नोई के पास कई बार ऑटो में बैठने के पैसे नहीं होते थे। इसलिए वे दौड़ते हुए भीलवाड़ा शहर की लवकुश व्यायामशाला आते थे। बचपन के दिनों को याद करते हुए निर्मल बताते हैं कि मोहल्ले के पहलवानों को देखकर पहलवानी का शौक लगा। निर्मल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण पहलवानों जैसी डाइट नहीं ले सकते तो भीलवाड़ा के आसपास होने वाले दंगलों में भाग लेते और वहां से पुरस्कार के रूप में मिलने वाली राशि को डाइट पर खर्च करते थे। पिता व भाई का सपना भी था कि मैं पहलवान बनूं। निर्मल ने बताया कि वे पढ़ाई में कमजोर थे तो उन्होंने पहलवानी की ओर ही अधिक ध्यान दिया। निर्मल का लगभग सात माह पहले कर्मचारी राज्य बीमा निगम में एलडीसी के रूप में चयन हुआ है। निर्मल ने आमिर खान की दंगल फिल्म में भी काम किया है। वे अपनी सफलता का श्रेय कोच रामनिवास गुर्जर को देते हैं।

राजस्थान-एमपी किशोर

िनर्मल विश्नोई

12 में 3 अखाड़ों में ही है मेट, इसलिए कुश्ती एकेडमी खोलने की जरूरत

बचपन में अखाड़े में लड़कियां नहीं थी तो लड़कों के साथ जोर आजमाइश कर मनीषा बनीं पहलवान

लादू जाट अपने गुरु रामनिवास गुर्जर के साथ

दंगल में कुमार का खिताब जीतने वाले गठीलाखेड़ा निवासी 23 वर्षीय लादू जाट के संघर्ष और जीत की कहानी दिलचस्प है। बचपन से कुश्ती का शौक रखने वाले लादू सर्दी, गर्मी हो या बरसात सुबह चार बजे साइकिल से भीलवाड़ा की लवकुश व्यायामशाला में अभ्यास के लिए आते थे। उनके भाई भी कुश्ती से जुड़े रहे हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से उन्हें बीच में पढ़ाई व कुश्ती छोड़नी पड़ी। लादू के भी कुश्ती छोड़ने की नौबत आई तो भाइयों ने हौसला बढ़ाया। भाइयों को ग्रामीणों के ताने भी सुनने पड़े कि भाई को काम धंधा करवाओ कुश्ती में कुछ नहीं रखा, क्यों हाथ पैर तुड़वा रहे हो? इसके बावजूद भाई पीछे नहीं हटे। जाट ने यह खिताब भीलवाड़ा के बबलू गुर्जर को हराकर जीता। इससे पहले बबलू से लादू छह मुकाबलों में हार चुके थे। कुछ दिन पहले लादू ने तय किया कि जब तक बबलू को हरा नहीं देगा शादी नहीं करेगा। रविवार को उदयपुर में ये खिताब जीतने के बाद सोमवार को लादू की शादी की तारीख भी तय हो गई। वे कुमार का खिताब जीतने का श्रेय कोच रामनिवास गुर्जर को देते हैं। लव-कुश व्यायामशाला के लादू ने दो साल रोहतक स्थित मेहर सिंह अखाड़े में प्रशिक्षण लिया।

राजस्थान-एमपी कुमार

लादू जाट

भास्कर नॉलेज... हर साल राजस्थान से 30 पहलवान जाते हैं नेशनल

1930

में शुरू हुआ था पहला अखाड़ा

12

अखाड़े हैं शहर में

प्रतियोगिता में, इनमें से 40% भीलवाड़ा के होते हैं

हर साल सब जूनियर, जूनियर व सीनियर नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में वजन की 30 अलग-अलग कैटेगरी में राजस्थान में से 30 पहलवान भाग लेते हैं। इनमें हर साल 10 से 12 पहलवान भीलवाड़ा के होते हैं।

यह बात वर्ष 2016 की है। पिता अपनी दोनों छोटी बेटियों को अखाड़े में ले जाने लगे और इनमें से एक बेटी ने मैडल जीता तो बड़ी बेटी नाराज हो गई। वह बोली, आपकी दोनों बहनें ही चहेती हैं मैं नहीं। मैं भी कुश्ती सीखकर मैडल जीतना चाहती हूं। यह कहानी है शहर के माणिक्य नगर स्थित मालीखेड़ा में रहने वाले छाेटू लाल माली की बेटी मनीषा की। उसने उदयपुर में हुए दंगल में कुमारी का खिताब जीता है। मनीषा का परिवार भी हरियाणा के फोगाट परिवार की तरह है। कुश्ती सीखने के शुरुआती दिनों में बराबर की प्रतिद्वंद्वी नहीं होने के कारण वे लड़कों के साथ जोर आजमाइश करती थीं। मनीषा को अखाड़े ले जाते समय पड़ोसी, रिश्तेदार कहते थे, लड़की है आगे-पीछे ससुराल ही जाना है। वे कुमारी का खिताब जीतने का श्रेय कोच तेजेंद्र गुर्जर को देती हैं। छोटू की तीन में से बीच वाली बेटी माया कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड व सिल्वर मैडल जीत चुकी हैं। चंचल सबसे छोटी है जो जूडो खेलती हैं।

राजस्थान-एमपी कुमारी

मनीषा माली

200

हरियाणा के फोगाट परिवार जैसी कहानी

पहलवान नेशनल व इससे दोगुने स्टेट प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं।

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