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अमेरिका में 3 साल में 40 कोर्स, डबल डॉक्टरेट करने वाले दक्षिण एशिया के पहले व्यक्ति
डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रांत (अब मध्यप्रदेश के महू) में हुआ। उनके पिता सेना में सूबेदार रामजी सकपाल और मां भीमाबाई सकपाल थीं। 1897 में परिवार मुंबई चला गया और आंबेडकर ने एलफिंस्टन हाई स्कूल में प्रवेश लिया। मैट्रिक्यूलेशन के बाद उन्होंने 1907 में एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया। 1912 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में डिग्री ली। फिर 1913 में उन्हें तीन साल के लिए 11.50 पाउंड स्टर्लिंग प्रति माह की बड़ोदा स्टेट स्कॉलरशिप मिली थी, जिसकी मदद से वे न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अध्ययन करने गए।
जून 1915 में उन्होंने मुख्य विषय अर्थशास्त्र के साथ समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शन और एंथ्रोपोलॉजी (मानव उत्पत्तिशास्त्र) के साथ एमए किया। उन्होंने प्राचीन भारतीय वाणिज्य पर अपनी थीसिस लिखी।
1916 में उन्होंने एक और एमए के लिए दूसरी थीसिस ‘नेशनल डिविडेंड ऑफ इंडिया- ए हिस्टोरिक एंड एनालिटिकल स्टडी’ विषय पर लिखी। आखिर में तीसरी थीसिस पर उन्हें 1927 में अर्थशास्त्र में पीएचडी डॉक्टोरल उपाधि मिली। उसके बाद डॉ. आंबेडकर लंदन चले गए।
मई 2016 में उन्होंने एंथ्रोपोलॉजिस्ट अलेक्जेंडर गोल्डनवाइजर द्वारा आयोजित सेमीनार में अपना पेपर ‘कास्ट्स इन इंडिया : देयर मेकेनिज्म, जेनेसिस एंड डेवलपमेंट।’
अक्टूबर 1916 में उन्होंने ग्रेज-इन में बार कोर्स में नामांकन कराया और इसके साथ उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी प्रवेश लिया, जहां वे पीएचडी पर काम करने लगे। लेकिन, स्कॉलरशिप खत्म होने के कारण उन्हें जून 1917 में भारत लौटना पड़ा। फिर उन्हें चार साल के भीतर थीसिस पूरी करने के लिए लौटने की अनुमति मिल गई।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में उन्होंने 1921 में मास्टर डिग्री ली और 1923 में डीएसएसी की उपाधि ली। उनकी तीसरी (कोलंबिया, 1952) और चौथी (उस्मानिया, 1953) डॉक्टरेट उपाधि उन्हें सम्मान स्वरूप प्रदान की गई।
न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी में तीन साल अध्ययन के दौरान उन्होंने अर्थशास्त्र में नौ कोर्स, इतिहास में ग्यारह, समाजशास्त्र में छह, दर्शनशास्त्र में पांच, एंथ्रोपोलॉजी में चार, राजनीति में तीन और फ्रेंच व जर्मन भाषा में एक-एक कोर्स पूरे किए। आंबेडकर न सिर्फ विदेश में इकोनॉमिक्स में पीएचडी करने वाले पहले भारतीय थे बल्कि वे इकोनॉमिक्स में डबल डॉक्टरेट करने वाले पूरे दक्षिण एशिया में पहले व्यक्ति थे।
लंदन में आयोजित सेमीनार में अपना पेपर ‘कास्ट्स इन इंडिया : देयर मेकेनिज्म, जेनेसिस एंड डेवलपमेंट’ पढ़ा