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देश में 60% मौतें बीमारियों की जांच नहीं होने से होती हैं : मोदी

3 वर्ष पहले
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मोदी ने बीजापुर में पहले हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर का उद्धाटन किया

मोदी 4 साल में चार योजनाएं छत्तीसगढ़ से लॉन्च कर चुके हैं

भास्कर न्यूज | बीजापुर (छत्तीसगढ़)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की 127वीं जयंती पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में अायुष्मान भारत योजना की शुरुआत की। इसके तहत उन्होंने देश के पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया। मोदी ने कहा कि देश में मधुमेह, हृदय रोग, सांस की बीमारियां, कैंसर के चलते 60% मौतें होती हैं। ये बीमारियां वक्त रहते पता चल जाएं तो इन्हें रोका जा सकता है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सभी जांचें मुफ्त में की जाएंगी। युवा मुझे सुझाव दें। ताकि जिसे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कहा जा रहा है, आगे गांव का आदमी भी उसे बोल सकंे, समझ सकें। मैं ऐसा नाम देना चाहता हूं। देश की हर बड़ी पंचायत में करीब डेढ़ लाख जगहों पर सब सेंटर और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किए जाएंगे।

मोदी ने कहा कि यदि एक गरीब मां का बेटा और अति पिछड़े तबके से आने के बावजूद वह पीएम है तो बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की देन है। बाबा साहेब उच्च शिक्षित थे। अगर वह चाहते तो दुनिया के समृद्ध देशों में बहुत शानदार जिंदगी बिता सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। प्रधानमंत्री ने ग्राम स्वराज अभियान की भी शुरुआत की। इससे पहले मोदी छत्तीसगढ़ से श्यामा प्रसाद मुखर्जी अर्बन मिशन और प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का शुभारंभ कर चुके हैं।

राजनीति: दलित समुदाय को भरोसे में लेने की कोशिश
एससी-एसटी एक्ट को लेकर विपक्ष भारत बंद कर चुका है। ऐसे में मोदी ने आंबेडकर जयंती पर दलितों को भरोसे में लेने की कोशिश की। उन्होंने जय भीम के नारे भी लगवाए। कहा कि बीजापुर में बाबा साहेब के नाम की गूंज आपको धन्य कर रही है।

पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना लॉन्च की, बोले- बाबा साहेब की वजह से पीएम बना हंू, जय भीम के नारे भी लगवाए
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मोदी ने आदिवासी महिला को चप्पलें पहनाईं, रेल ट्रैक का उद्धाटन किया
मोदी ने रैली में एक आदिवासी महिला को अपने हाथों से चप्पलें पहनाईं। राज्य में चरण-पादुका योजना के तहत तेंदू पत्ता बीनने वाली आदिवासी महिलाओं को चप्पलें दी जानी हैं। पीएम ने गुदुम और भानुप्रतापपुर के बीच नई रेल लाइन को हरी झंडी दिखाई। बस्तर नेट प्रोजेक्ट की शुरुआत भी की।

दुनिया की सबसे बड़ी हैल्थ स्कीम आयुष्मान भारत

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

इस स्कीम में 10.74 करोड़ परिवारों को मिलेगा 5 लाख रुपए के बीमा का लाभ
आयुष्मान भारत योजना के दो कंपोनेंट हैं। 10.74 करोड़ से अधिक गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पांच लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा। स्कीम का दूसरा पिलर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर है। यह स्कीम पूरी तरह से जुलाई के बाद देश भर में लागू हो सकती है।

किस तरह लोगों की पहचान होगी ग्रामीण गरीबों का ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरी गरीबों का शहरी विकास मंत्रालय ने सूची तैयार कर रखी है। इसी के आधार पर स्कीम का लाभ मिलेगा। 2.5 लाख पंचायतों में एक साथ 30 अप्रैल को एबी-एनएचपीएम स्कीम के लाभार्थियों की सूची लगेगी।

कैसे मिलेगा स्कीम का लाभ राज्यों से बात करके रोडमैप तैयार करने पर काम चल रहा है। कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थी को अपना पहचान पत्र और सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना में नाम दिखाना होगा। स्कीम का टेंडर कैसा होगा, ये जानकारी भी 15 अप्रैल तक दी जाएगी।

खर्च: 12 हजार करोड़ रु. का खर्च आएगा, 60% केंद्र का
आयुष्मान स्कीम से देश के करीब 10 हजार अस्पताल इलाज देने के लिए तैयार हैं। हालांकि किस राज्य में किस अस्पताल को स्कीम में शामिल किया जाए। इसका निर्णय राज्य सरकार लेगी।

नीति आयोग का आकलन है कि इस स्कीम पर सालाना 10 से 12 हजार करोड़ रु. का खर्च आएगा। 60% केन्द्र और 40% राज्य सरकार वहन करेगी। पहाड़ी राज्यों में 90% हिस्सा केन्द्र सरकार देगी।

दुनिया में सबसे अच्छी हैल्थ सर्विस ब्रिटेन की है...
आयुष्मान भारत स्कीम के तहत 1350 तरह की जांच, इलाज, सर्जरी और दवा मुफ्त मिलेगी
नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) 1948 से लागू है। इंग्लैंड के निवासियों के लिए यह मुफ्त है। सरकार हेल्थकेयर फ्री सुविधा देती है। इंग्लैंड जीडीपी का 9.9% एनएचएस पर खर्च करता है। भारत में हेल्थकेयर पर जीडीपी के 5.5% खर्च होता है।

क्या लाभार्थी का कार्ड बनेगा

एबी-एनएचपीएम का लाभ लेने के लिए लाभार्थी परिवार का कैशलेस कार्ड बनेगा। यह कार्ड डाक घर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और ब्लॉक में तैयार होगा। नीति आयोग के मुताबिक स्कीम को आधार से जोड़ा जाएगा। राशन कार्ड, वोटर आईडी भी स्वीकार्य होगा।

कितनी बीमारियां कवर होंगी

स्कीम के तहत 1350 तरह की जांच, इलाज, प्रोसिजर, सर्जरी और बीमारियों की जांच होगी। राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि स्कीम को इंश्योरेंस या ट्रस्ट मोड पर चलाए। स्कीम के तहत सिर्फ भर्ती होने वाले मरीजों को ही इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा।

बाजार: 10 लाख करोड़ की है भारत की हैल्थ इंडस्ट्री
भारत की हेल्थकेयर इंडस्ट्री करीब 10 लाख करोड़ रु. की है। 2020 तक इसके 18 लाख और 2022 तक 24 लाख करोड़ रु. तक पहुंचने का अनुमान है।

भारतीय सेहत पर 62% खर्च जेब से करते हैं। अमेरिका में यह 13.4%, इंग्लैंड में 10% और चीन में 54% है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार 29% परिवार ही हैं, जिनमें कम से कम एक सदस्य के पास हेल्थ इंश्योरेंस है।

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