अपरिग्रह व्रत के रक्षार्थ मुनिजन करते हैं कैशलोच: मुनिश्री
भिंड | शहर में जैन चैत्यालय मंदिर में विराजमान गणाचार्य विराग सागर महाराज के साथ छह मुनिराजों ने कैशलोच किया। गणाचार्यश्री ने कहा कि कैशलोच अहिंसा व्रत और अपरिग्रह व्रत की रथा के लिए मुनिजन करते हैं, क्योंकि बाल बढ़ने से जीवों की उत्पत्ति की संभावना होती है। मुनिजन जीवोत्पत्ति के पूर्व ही जीवों की रक्षार्थ कैशलोच करते हैं। कैंची या उस्तरा का उपयोग कैशलोच में नहीं करते हैं।