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हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने नपा ने नहीं चलाया अिभयान

3 वर्ष पहले
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नगर पालिका क्षेत्र में 140 वर्गमीटर एरिया में मकान बनाने पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना अनिवार्य है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि शहर में इस साइज के और इससे अधिक वर्गमीटर के करीब 60 हजार मकान बने हुए हैं। वहीं साल 2016-17 में 150 से अधिक नए मकानों का निर्माण हुआ है। जिन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनुमति नपा द्वारा दी गई है, लेकिन उसके बाद भी किसी भी मकान पर सिस्टम नहीं बने हुए हैं। सबसे अहम बात यह है कि इस संबंध में नपा अधिकारियों को जानकारी है। वहीं नगरपालिका के रिकार्ड में केवल अनुमति देने का उल्लेख किया गया है, सिस्टम लगाया गया कि नहीं। इसका कोई उल्लेख नहीं है।

नए मकानों में नहीं लगवा रहे हार्वेस्टिंग सिस्टम
इंजीनियर नहीं करते मौके पर निरीक्षण
नगर पालिका में जब भी मकान निर्माण की अनुमति दी जाती है उसके नियमानुसार 1400 वर्गमीटर से 200 वर्गमीटर वाले क्षेत्र में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 7 हजार रुपए, 200 वर्गमीटर से 300 वर्गमीटर के लिए दस हजार रुपए, 400 वर्गमीटर से अधिक वाले एरिया में सिस्टम बनाने के लिए 15 हजार रुपए अमानत राशि के तौर पर जमा करती है। इसके बाद सिस्टम लगने के बाद और इंजीनियर के निरीक्षण के बाद यह राशि वापस कर दी जाती है। खास बात यह है कि 150 नए मकान बन भी गए, लेकिन इन मकानों में इंजनीयर ने निरीक्षण किया ही नहीं, अन्यथा की स्थिति में इन भवनों में भी रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनवाने वालों पर कार्रवाई की जाती।

100 घरों का भू-जल स्तर बढ़ सकता है
जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले जानकारों का कहना है कि हार्वेस्टिंग सिस्टम महज 10 से 15 हजार रुपए की लागत में यह सिस्टम अपने घर के अंदर और बाहर तैयार कराया जा सकता है। किसी काॅलोनी में 25 घरों में भी वाटर रिचार्ज सिस्टम लगाया जाए तो इससे लगभग 100 घरों का भूजल स्तर बढ़ सकता है।

नहीं चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
नगर पालिका की भवन शाखा द्वारा साल 2016-17 में 150 नए भवनों निर्माण की अनुमति दी गई है। लेकिन इनमें से एक ने भी वॉटर हार्वेस्टिंग नहीं लगाया। वहीं नपा के इंजीनियर भी भवन निर्माण के दौरान सिस्टम का निरीक्षण करने नहीं जाते हैं। यहीं कारण है कि नपा द्वारा प्रचार-प्रसार के अभाव में आम जन तो दूर नगर पालिका के अफसर भी सुस्ती बरत रहे हैं। नपा के अनुसार भूमि विकास अधिनियम के अनुसार 1400 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगना अनिवार्य है। परेशानी की बात यह है कि लोग दो से तीन मंजिला मकान बना रहे हैं, लेकिन उनमें सिस्टम लगाने को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है।

नए मकानों की जांच कर करेंगे कार्रवाई
शासन ने नए भवन में निर्माण के साथ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया है। नपा द्वारा जिन मकानों के निर्माण की अनुमति दी गई है। वहां पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। इसकी जांच कराई जाएगी। रामनरेश शर्मा, उपाध्यक्ष, नपा भिंड

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