भगवान की भक्ति में अपार शक्ति होती है: शास्त्री
भक्ति में शक्ति होती है और शक्ति से ही सबका कल्याण होता है। वहीं भगवान को सिर्फ भक्ति के माध्यम से ही पाया जा सकता है। यह सबसे सरल मार्ग है। यह बात ग्राम खेरा में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन पंडित देवनारायण शास्त्री ने कही।
उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए मनुष्य जब भक्ति करता है तो भक्ति के दौरान उसके सामने विषय परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि इनसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि भक्ति को बढ़ाने के लिए निरंतर जप-तप करते रहना चाहिए, इससे मनुष्य का शारीरिक व मानसिक विकास होता है।
कलियुग में सतसंग व भक्ति के माध्यम से भगवान को पाया जा सकता है। भगवान से संसार रूपी धन नहीं मांगना चाहिए। बल्कि भगवान से यह मांगना चाहिए कि हे प्रभु मेरा चित निरंतर आपके चरणों में लगा रहे। मैं आपको कभी भूलूं नहीं। कथा व्यास भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की महिमा अपार है। पूतना उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पूतना का अर्थ है अज्ञान, अविद्या, पूतना वासना का स्वरूप है, माया में फसे हुए व्यक्ति को ही पूतना मारती है। श्रीकृष्ण तो परब्रह्म परमात्मा हैं। गुणातीत हैं माया से रहित महायोगी हैं। उन्हें तो माया स्पर्श भी नहीं कर सकती। फिर पूतना जैसी राक्षसी उन्हें कैसे मार सकती है।