भगवान परशुराम की तपोभूमि को नहीं मिला पर्यटन में स्थान
भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि को पर्यटन स्थल का दर्जा देने की घोषणा के 10 साल बाद भी इस दिशा में कोई अमल नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2008 को जमदारा में भगवान परशुराम के भव्य मंदिर निर्माण और इस स्थान को पर्यटन स्थल का दर्जा देने की घोषणा की थी। लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी घोषणा थोथी साबित होने से तपोभूमि से भक्तों में शासन के प्रति खासी नाराजगी है।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2008 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भगवान परशुराम की तपोभूमि पर आए। उन्होंने यह पर बने भगवान के मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए कहा था कि जमदारा में भगवान परशुराम के मंदिर निर्माण में धन की कमी नहीं आने देंगे। यह स्थल तीर्थ के रूप में विकसित होगा।
इस भव्य मंदिर का निर्माण भी परशुराम की जन्मस्थली (महू) जानापाओं में किए जा रहे विशाल मंदिर की तर्ज पर होगा। मंदिर निर्माण का नक्शा तैयार कर 20 लाख रुपए की राशि की व्यवस्था की जा चुकी है। भव्य मंदिर के निर्माण के साथ ही यहां संस्कृति विद्यापीठ और अतिथि भवन का निर्माण भी यहां पर कराया जाएगा। लेकिन सीएम की घोषणा के दस साल बीतने के बाद भी यहां पर अभी तक किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
चंदा करके कमरे का कराया निर्माण
मंदिर के पुजारी बालकृष्ण, मुन्ना बाबा ने मंगलवार को भास्कर से चर्चा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने भगवान की तपोभूमि को तीर्थ और पर्यटन स्थल का दर्जा देने की घोषणा की थी। साथ ही के नवीन मंदिर निर्माण की बात कही थी। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। इस बात को लेकर ब्राह्मण समाज में सीएम के प्रति काफी आक्रोश है। वहीं इस मंदिर में लोगों के बैठने के लिए ग्रामीण लोगों ने चंदा करके एक कमरे का निर्माण कराया है। साथ ही समाजसेवी अशोक भारद्वाज ने स्वयं के खर्च पर बाउंड्रीवाल बनवाई है।
धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान परशुराम का जन्मोत्सव
जिला मुख्यालय से 62 किलोमीटर दूरी पर जमदारा गांव है। भगवान परशुराम ने इसी गांव की धरती पर अपनी माता रेणुका का सिर अपने पिता के आदेश पर फरसे से काटकर गर्दन से अगल किया था। प्राचीन कथा के अनुसार माता रेणुका स्नान के लिए नदी किनारे गई। संयोग से वहीं पर गंधर्वराज चित्र रथ भी स्नान करने आया था, जो बहुत सुंदर और आकर्षक था। जिसे देखकर रेणुका भी उस पर आसक्त हो गई। ऋषि जमदग्नि ने अपने योगबल से अपनी प|ी के इस आचरण को जान लिया। जमदग्नि ऋषि माता रेणुका के इस आचरण से दुखी हाेकर अपने पांचों पुत्रों को अपनी मां का सिर काटने का आदेश दिया। लेकिन परशुराम को छोड़कर किसी भी पुत्र ने मां से स्नेह के कारण वध करने से मना कर दिया। वहीं परशुराम ने पिता के आदेश पर अपनी मां का सिर काटकर अलग कर दिया। उनके इस कार्य से प्रसन्न जमदग्नि ने जब उनसे वर मांगने का आग्रह किया तो परशुराम ने सभी के पुनर्जीवित होने व पूरे घटनाक्रम की स्मृति नष्ट हो जाने का ही वर मांगा।
सहस्त्रार्जुन को पकड़ने पलट दी थी धरती
जिले के लोगों की ऐसी मान्यता है कि चंद्रवंशी राजा सहस्त्रार्जुन ऋषि जमदग्नि की कामधेनु गाय को प्राप्त करना चाहता था। इस कारण उसने ऋषि का वध किया। अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए परशुराम सहस्त्रार्जुन का पीछा करते हुए मौ पहुंच गए। उस दौरान सहस्त्रार्जुन जमीन के अंदर जाकर छुप गया। भगवान को उसके धरती के अंदर छिपा होने के कारण उन्होंने मौ क्षेत्र की भूमि को उलट दिया। आज भी मौ में खुदाई के दौरान पुरानी वस्तुएं पलटी हुई मिलती हैं।