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पत्रिका विराग वाणी का हुआ िवमोचन, मुनिराजों ने किया विहार

3 वर्ष पहले
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शहर के बताशा बाजार में स्थित ऋषभ सत्संग भवन में बुधवार को राष्ट्रीय जैन संत विराग सागर महाराज ने मासिक पत्रिका विराग वाणी का विमोचन किया। इसी क्रम में शहर के चैत्यालय जैन मंदिर से दोपहर के समय जैन मुनिराजों ने बरासों के लिए मंगल विहार किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने विहार कर रहे मुनिराजों का स्वागत किया। इस मौके पर रतनलाल जैन भारौली, राकेश जैन मंडी, रविसेन जैन, वीरेंद्र जैन, मनोज जैन, सुनील जैन, अशोक महामाया, मनोज जैन उपस्थित रहे।

पत्रिका विमोचन के दौरान विराग सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए बताया कि अक्षय तृतीया के दिन आदिनाथ भगवान को इक्षुरस से आहार हुआ था। अक्षय और तृतीया दो शब्दों को मिलाने से अक्षय तृतीया शब्द बनता है। जैनागम में इसका बहुत बड़ा रहस्य है। प्रथम तीर्थेश भगवान आदिनाथ स्वामी ने जब राज्य, परिवार छोड़कर दीक्षा ग्रहण की तो दिगंबरी दीक्षा के पश्चात वे 6 माह के उपवासों का संकल्प ले ध्यानमग्न हो गए।

आचार्य श्री ने आगे कहा कि आहारदान महादान कहा गया है। पूजा विधान आदि अन्य धर्म कार्यों से अधिक महत्वपूर्ण एवं फलदायी आहारदान माना गया है। जैन संतों की आहारचर्या विश्व में आश्चर्य का विषय बनी हुई है। लोग कहते है इतनी कठिन आहार की विधि होती है फिर भी श्रावक लाइन लगाकर खड़े होते है जब हम भोपाल में थे वहां 200 चौके लगते थे ललितपुर में भी 100-105 चौके लगते थे और भिंड में 60 चौके लग रहे है आखिर क्यों क्योंकि उन्हें आहार देने से होने वाले लाभ का भान हो चुका है आहार दान में दिया गया दान एक ग्रास भी बट वृक्ष की तरह फल प्रदान करता है।

धर्म

ऋषभ सत्संग भवन में बुधवार को धर्मसभा प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया

भगवान ने आहार में लिया गन्ने का रस

प्रवचन में महाराज ने बताया कि भगवान आदिनाथ स्वामी 7 माह 8 दिन आहार के लिए परिभ्रमण करते रहे उसके पश्चात वे हस्तिनापुर मे पहुंचे वहां के राजा श्रेयांस और सोम ने रात्रि के समय तीन शुभ स्वप्न देखे फलस्वरूप जाति स्मरण से उन्हें भगवान की आहार विधि ज्ञात हो गई और 13 माह 8 दिन बाद भगवान आदिनाथ का पड़गाहन राजा श्रेयांस ने किया और उन्हें आहार दान दे दिया उस समय भगवान ने मात्र तीन अंजुली प्रमाण गन्ने का रस आहार में लिया था। देवों ने आकाश से पुष्पवृष्टि करना प्रारंभ कर दी सारी सृष्टि में प्रसन्नता छा गई। भगवान के आहार होने से अक्षय तृतीया के नाम से विख्यात हुआ आज हम सभी भगवान की पूजन भक्ति के साथ संतों को जरूर आहार दान दे क्योंकि आज के दिन दान तीर्थ का प्रवर्तन हुआ था।

मुनिराजों ने बरासों के लिए किया विहार

गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के संघस्थ मुनिराज मुनि विवर्धन सागर जी महाराज, श्रमण मुनि विश्रुत सागर जी महाराज के साथ पांच मुनिराजों ने बरासों के लिए 3 बजे मंगल विहार किया। वे 22 से 27 अप्रैल 2018 तक बरासों में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होंगे। इस मौके पर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, महेंद्र जैन, प्रकाश जैन, विनोद जैन, सुरेश जैन, राजीव जैन, संतोष जैन, सुनील जैन, मनोज जैन, आभा जैन, स्नेहलता जैन, संगीता पवैया, नीलम जैन, निशा जैन, बबिता जैन, सुनीता जैन, अनीता जैन, प्रीती जैन, रेखा जैन आदि लोग बढ़ी संख्या मे उपस्थित रहे।

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