मुझे जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) या डीयू (दिल्ली यूनिवर्सिटी) में एडमिशन लेना है तो सरकार फीस में हमारी कितनी मदद करेगी। हमें खुद फीस भरना होगी। या टॉपर्स होने के नाते सरकार मेरी फीस भरेगी। यह सवाल शहर के पीडब्लूडी कॉलोनी निवासी और शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक एक के छात्र रोहित श्रीवास्तव ने सोमवार की सुबह मोबाइल फोन पर सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछा।
जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमानुसार फीस भरी जाएगी। वे चिंता न करें। यहां बता दें कि रोहित ने कक्षा 12वीं में जिले की मैरिट लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम आने के बाद सरकार ने एमपी करियर काउंसिलिंग एप का शुभारंभ करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए स्कूली बच्चों से सीधा संवाद किया। इसके लिए शहर के नंबर एक स्कूल में बच्चों को एकत्रित किया गया था। जहां से रोहित श्रीवास्तव ने फोन पर मुख्यमंत्री से बात की। वहीं भोपाल की एक छात्र ने पूछा कि मैं ओबीसी और मेरा दोस्त एससी, हम दोनों ने साथ पढाई की मेरे 81 फीसदी नंबर फिर भी लेपटॉप नहीं, जबकि उसके 77 फीसदी नंबर आने पर मिल गया लेपटॉप, शिक्षा में आरक्षण क्यों? सीएम बोले सबका ध्यान रखना पढ़ता है भोपाल के छात्र के इस सवाल पर विद्यार्थियों ने जमकर ताली बजाई। भिंड के नंबर एक स्कूल में इस अवसर पर 60 से ज्यादा बच्चे उपस्थित थे।
रोहित
रोहित ने पूछा- मुझे जेएनयू या डीयू में एडमिशन लेना है, सरकार फीस में कितनी मदद करेगी, सीएम बोले- आप चिंता मत करो
भोपाल की मोहिनी, गंुजन और अंकित गुप्ता ने मुख्यमंत्री से पूछे सवाल
आपने अपना कॅरियर कैसे चुना जवाब... दिल की सुनो
भोपाल की मोहनी सागर ने पूछा कॅरियर को चुनते समय परेशानी अक्सर होती है। आपने कैसे अपना प्रोफेशन चुना। जवाब में सीएम ने कहा कि मेरे परिजन मुझे डॉक्टर बनाना चाहता थे पर मुझे फ्रॉग का डिसेक्शन पसंद नहीं था। मन में कुछ करने की रुचि जरूर थी। उन्होंने अपने छात्र जीवन का किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब वह कक्षा 7 में पढ़ते थे तो मजदूरों को मिलने वाली कम मजदूरी के लिए आंदोलन किया। हाथों में लाठी और पेट्रोमेक्स लेकर कुछ मजदूरों के साथ रात को निकले। जब चाचाजी के घर के सामने से निकले तो उन्होंने हाथ का लठ्ठ छुड़ाया और थप्पड़ लगाया। मजदूर पेट्रोमेक्स छोड़कर भाग गए। पर मेरी दिशा तय हो गई और जनसेवा के क्षेत्र में आ गया। इसलिए दिल जो कहे उसे मानो।
गुंजन ने कहा- राजनीति में मुझे आना है मुख्यमंत्री बोले- कांटों भरा रास्ता है
भोपाल की गुंजन सिंह ने कहा कि उसके 87 फीसदी अंक है। वह राजनीति में आना चाहती है। इसके लिए क्या तैयारी करनी पड़ती है। वह आप जैसी सफल राजनीतिज्ञ बन सकती है क्या। इसके लिए क्या विशेष योग्यता है। जवाब में सीएम ने कहा कि अच्छे लोगों को राजनीति में आना चाहिए। हालांकि यह रास्ता बाहर से बेहद आसान नजर आता है पर होता बहुत कांटों भरा है। इसमें झूठे आरोप, प्रत्यारोप भी लगते है। दिल में देश सेवा का जज्बा हो और अपने लिए नहीं दूसरे के लिए सोचने की शक्ति हो तो आप भी सफल राजनीतिज्ञ बन सकती है।
क्या चुनाव के दौरान आपको भय नहीं लगता
भोपाल के अंकित गुप्ता ने पूछा कि जीवन की नई शुरुआत में असफलता का भय रहता है। क्या चुनाव के दौरान आपको भय नहीं लगता। इससे कैसे बचते है आप। सीएम ने जवाब दिया कि एक सूत्र देता हूं, बेटा याद रखना। काम करते समय परिश्रम की चिंता मत करो। हमेशा निष्पक्ष सोचो, घमंड मत करो, धैर्य से काम लो, उत्साह से काम करो। क्योंकि मरे मन से कोई काम सफल नहीं होता। नया विचार लेकर जाओगे तो मुर्दे में भी प्राण फूंक दोगे।
24 घंटे पहले ही मंगवा लिए थे सवाल
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए छात्रों से सीधे मोबाइल पर बात करने का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भले ही दावा करते हों। लेकिन हकीकत यह है कि जिन छात्रों से मुख्यमंत्री की बात हुई, उनके नाम तीन दिन पहले ही तय हो गए थे। साथ ही 24 घंटे पहले ही उनसे सवाल पूछ लिया गया था। रोहित ने बताया कि रविवार को ही उनके पास भोपाल से किसी सीमा भाग का फोन आया था, जिन्होंने सवाल पूछा। साथ ही बताया कि उन्हें किस तरह से बात करना है। वहीं आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान रोहित को स्कूल के शिक्षकों ने अलग कमरे में बैठाए रखा। वजह यह थी कि उनकी फोन पर बात होना थी।