किला परिसर स्थित जैन मंदिर में गणाचार्य विराग सागर महाराज के सानिध्य एवं उच्चारणाचार्य श्री 108 विनम्र सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री विज्ञ सागर महाराज, मुनि श्री विनन्द सागर महाराज के सानिध्य तथा विशल्य भारती भैया के मार्गदर्शन में श्री विराग संस्कार शिक्षण शिविर समापन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर त्रिदिवसीय 1008 जिन सहस्त्रनाम मंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया।
इस अवसर पर मुनि श्री 108 विज्ञ सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज जो हमें अच्छा मकान, धन वैभव आदि मिला है वह सब भगवान की भक्ति का ही फल है, इसलिए हमें हजार करोड़ काम छोड़कर भगवान की भक्ति करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन भक्ति में आत्मशांति का भंडार है, समस्त सुखों का खजाना है, पाप, ताप एवं संताप को नष्ट करने वाली एक मात्र जिनभक्ति है। जिनभक्ति से ही कालसर्प योग, शनि ग्रह आदि अरिष्ट बाधा, भूत व्यंतर बाधा विभिन्न व्यवधान समाप्त हो जाते हैं।
जिन सहस्त्रनाम विधान
किला जैन मंदिर में श्री 1008 जिन सहस्त्रनाम विधान का हुआ शुभारंभ, मुनिश्री ने दिए प्रवचन
बालिकाओं ने किया सांस्कृतिक नृत्य
जिन सहस्त्रनाम मंडल विधान के सुअवसर पर उच्चरणाचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य मुनि श्री 108 विज्ञ सागर महाराज, मुनि श्री विनन्द सागर महाराज का सानिध्य जैन समाज के श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। सायंकालीन सभा में आनंदयात्रा प्रश्नमंच, महाआरती के साथ ही भोपाल की संगीतमय ऋषि जैन पार्टी एवं विराग श्रुत आराधना मंडल की बालिकाओं द्वारा भव्य नाट्य मंचन किया गया। जिसमें समाज के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर मुनि श्री के प्रवचनों व उद्बोधन को जीवन में उतारा। भक्तगण महाराज के दर्शनों का सौभाग्य पाने के लिए पहुंचे और जीवन के कल्याणकारी मोक्ष की कामना करते हुए मुनिश्री के बताए मार्गों पर चलने का प्रण लिया। इस अवसर पर वीर वर्धमान ग्रुप, विराग आदर्श बालिका मंडल, विराग विशुद्ध बहुमंडल, राष्ट्रीय विराग महिला मंच आदि के पदाधिकारी उपस्थित थे।
ज्ञान-वैराग्य धारण करे समाज: मुनिश्री
प्रशिक्षण शिविर के दाैरान मुनिश्री विराग सागर महाराज के सानिध्यम में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने ज्ञान-वैराग्य धारण करने महाराज के बताए मार्गों का अनुशरण कर उन्हें अपने जीवन में उतारा। मुनिश्री ने बताया जिन सहस्त्रनाम मंडल विधान का शुभारंभ भक्तों के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा। इस विधान में भगवान महावीर स्वामी के पदचिन्हों पर चलने का कल्याणकारी कदम जीवन में उतारें। उन्होंने बताया जीवन के सभी नैतिक मूल्यों को समझने के लिए ज्ञान की प्राप्ति होना अति आवश्यक है। ज्ञान प्राप्ति के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि व्यक्ति को एक स्थान पर नित्य चिंतन करने से अमूल ज्ञान का बोध होता है। जिन ऋषि मुनियों ने ज्ञान के अपार भंडार को प्राप्त किया है, वह महापुरुष थे। विनम्र सागर महाराज को कलेक्टर इलैयाराजा टी ने श्रीफल भंेट किया इस दौरान विनम्र सागर महाराज ने कलेक्टर की कार्य प्रणाली को लेकर प्रशंसा की। इस अवसर पर प्रकाश चंद्र जैन, रतनलाल महेंद्र कुमार, रमेश चंद्र, संजीव कुमार जैन और पवन जैन आदि मौजूद रहे।