बुराइयों का अंत केवल प्रकृति व गोसंवर्धन से ही हो सकता है: व्यास
गोवर्धन का अर्थ है गौ संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति व गोसंवर्धन से ही हो सकता है। यह बात वन खंडेश्वर मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन पंडित रमाकांत व्यास ने कही। उन्होंने कहा कि अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा। कर्म तो हमें करना ही होगा। गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाते हुए कहा कि इंद्र के कुपित होने पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठा लिया था। इसमें ब्रजवासियों ने भी अपना-अपना सहयोग दिया। कृष्ण ने कई वर्षों से चली आ रही भगवान इंद्र देव की पूजा अर्चना को बंद करा कर स्वयं गिरिराज रख कर ब्रज वासियों से अपनी ही पूजा करानी शुरू कर दी। इसीलिए इंद्र ने क्रोध में आकर मूसलाधार बरसात की थी। भगवान ने इंद्र का अभिमान दूर किया।