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5 साल पूर्व निकाली रोड निर्माण की राशि सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों ने लगाए नारे

3 वर्ष पहले
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ऊमरी के मोतीपुरा में रोड निर्माण नहीं होने पर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते ग्रामीण।



कलेक्टर ने दिया था जांच का भरोसा, नहीं हुई सुनवाई

मोतीपुरा रोड को लेकर एक माह पूर्व ग्रामीण जब कलेक्टर इलैया राजा टी से शिकायत करने पहुंचे तो कलेक्टर ने लोगों काे आश्वासन दिया था कि वह मामले की पूरी जांच कराएंगे। इसके लिए उन्होंने ग्वालियर की एक निजी कंपनी को जांच के लिए भी लिखा था। लेकिन एक माह बीतने के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि कलेक्टर को वह जनसुनवाई में तीन बार ज्ञापन देकर रोड निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन का हवाला देकर लोगों को गुमराह कर दिया जाता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि बरसात से पूर्व सड़कें नहीं बनाई गईं तो वह जनआंदोलन कर शासन व प्रशासन की नींद हराम कर देंगे। जिसकी जिम्मेदारी खुद प्रशासन के अधिकारियों की होगी।

ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

मोतीपुरा और देवगढ़ गांव के लोगों ने मंगलवार को सड़क पर खड़े होकर प्रशासन से बोले- लंबे समय से वह सड़क की बदहाली से गुजर रहे हैं। सरपंच, विधायक या सांसद हो सभी बोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। लेकिन किसी ने गांव की रोड बनाने के लिए पहल नहीं की है। बरसात के दिनों में हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि लोगों को हाथ में जूता-चप्पल लेकर मुख्य रोड तक पहुंचना पड़ता है। मोतीपुरा के प्रमोद सिंह यादव ने बताया कंपनी ठेकेदार ने पूर्व में निर्माण की राशि निकालकर रुपए का गबन कर लिया है। जिसकी जांच के लिए कलेक्टर ने आश्वासन दिया था, मगर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

सड़कें किस कारण नहीं बनीं, हम जांच कराएंगे

हमें जानकारी है कि मोतीपुरा और देवगढ़ की सड़कें मंजूर हैं, किन कारणों से नहीं डाली गई हैं या राशि निकाली गई है तो हम जांच कराएंगे। साथ ही संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -संतोष तिवारी, एसडीएम, भिंड

सड़कें नहीं बनीं तो दो गांव के ग्रामीण करेंगे आंदोलन

दोनों ही गांवों के ग्रामीणों ने लामबंद होकर शासन व प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। पूर्व में भी ग्रामीणों ने कई बार सरकार के खिलाफ आक्रोश प्रकट करते हुए नारेबाजी की है। लोगों का कहना है कि गांव में न रोड है और न हीं बिजली-पानी की सुविधा है। बरसात के दिनों में डिलीवरी वाली महिलाओं को निजी वाहनों से ऊमरी तक लाना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी के वक्त गांव में सेवाएं नहीं पहुंचती हैं। इस समस्या से जूझ रहे लोगों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए कहा कि इस बार गांव के लोग नेताओं के झांसे में नहीं आएंगे। अगर गांव में विकास कार्य होंगे तभी वह पोलिंग बूथों पर जाएंगे। मालूम हो कि एक माह बाद बरसात शुरू होने वाली है, अगर गांव की सड़कें नहीं बनाई गईं तो ग्रामीणों को पूर्व की तरह दलदल से होकर गुजरना पड़ेगा।

वोट लेने आने वाले नेताओं के झांसे में अब नहीं आएंगे

हम लंबे वक्त से रोड की बदहाली का सामना कर रहे हैं नेता हमें झांसा देकर वोट ले जाते हैं, चाहे वह सरपंच हो या विधायक हो, हमें पता चला है कि रोड में गबन किया गया है और ठेकेदार ने पैसा भी निकाल लिया है। हमने कंपनी ठेकेदार और कलेक्टर को अवगत कराया, लेकिन बरसात आने वाली है किसी ने सुनवाई नहीं की है। संजीव सिंह यादव, स्थानीय रहवासी, देवगढ़

बरसात में जूता-चप्पल हाथ में लेकर निकलना पड़ता है

गांव में काफी समय से रोड की सुविधा नहीं है, बरसात में जूता-चप्पल उतारकर मुख्य रोड तक जाना पड़ता है। हमने सरपंच कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायती आवेदन दिए, लेकिन रोड निर्माण को लेकर कार्य नहीं किया गया है। -रामू सिंह यादव, रहवासी, देवगढ़

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