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10 वीं कक्षा में सरकारी स्कूलों का 58% और प्राइवेट स्कूलों का 51% रहा परीक्षा परिणाम

3 वर्ष पहले
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क्योस्क संेटर पर परीक्षा परिणाम की जानकारी लेते विद्यार्थी।

शत-प्रतिशत परिणाम वाले तीन ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल

1 अटेर क्षेत्र के ग्राम पुर के हाईस्कूल में दर्ज 22 छात्र-छात्राओं में 18 प्रथम श्रेणी एवं 4 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। इस स्कूल के बच्चे पूर्व वर्षों में भी इसी प्रकार का परीक्षा परिणाम लाते रहे हैं। स्कूल के प्राचार्य डीपी शर्मा का कहना है कि शिक्षकों द्वारा नियमित पढ़ाने और छात्र-छात्राआें के मन लगाकर पढ़ने से परिणाम अच्छा आया है।

3 शासकीय उत्कृष्ट हायर सेकंडरी स्कूल क्रमांक एक में 10वीं का परीक्षा परिणाम 99.50 प्रतिशत रहा है। स्कूल के 203 छात्र-छात्राओं में 202 उत्तीर्ण हुए हैं जबकि एक को पूरक की पात्रता है। इस स्कूल का हासे का परिणाम 89% रहा है। प्राचार्य पीएस चौहान का कहना है कि बच्चों को समय-समय पर प्रोत्साहित करने और नियमित रूप से कक्षाएं लगने से ऐसा परिणाम आया है।

2 फूफ के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल का 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा है। यहां दर्ज 52 बच्चों में सभी उत्तीर्ण हुए हैं। इस प्रकार हायर सेकंडरी का परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत रहा है। 45 में 30 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। बेहतर परीक्षा परिणाम पर प्रभारी प्राचार्य पवन भदौरिया का कहना है कि यह शिक्षक और बच्चों की मेहनत की मेहनत का नतीजा है।

10वीं कक्षा के तीन साल का परीक्षा परिणाम

वर्ष परीक्षा परिणाम सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूल

2016 15.5 प्रतिशत 19 प्रतिशत 12 प्रतिशत

2017 23.61 प्रतिशत 29 प्रतिशत 16 प्रतिशत

2018 55.71 प्रतिशत 58 प्रतिशत 51 प्रतिशत

यह है नकल विरोधी अभियान का परिणाम

सेवानिवृत जिला शिक्षा अधिकारी गोपालसिंह भदौरिया का कहना है कि शासकीय शिक्षण संस्थाएं हमेशा ही बेहतर रही हैं। जब नकल का जोर बढ़ा तब जरूर प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए होड़ लगने लगी। नकल के दौर में भी सरकारी स्कूलों के बच्चे न केवल बेहतर परिणाम देते रहे हैं बल्कि मेरिट सूची में भी आते रहे हैं। तीन साल से कलेक्टर इलैया राजा टी के नेतृत्व में चल रही नकल विरोधी मुहिम का बेहतर परिणाम इस साल आया है। अब इस माहौल को बनाए रखने की चुनौती है।

सुविधाएं होने के बाद भी बिगड़ा परिणाम

जिन शासकीय स्कूलों में परीक्षा परिणाम बिगड़ा है, उनमें सुविधाएं होने के बाद भी शैक्षणिक माहौल निर्मित न हो पाना मुख्य कारण रहा है। इनके प्रमुखों पर परीक्षा परिणाम बिगड़ने को लेकर कोई ठोस कारण नहीं है। इसलिए शिक्षा विभाग खराब परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई करने की भी तैयारी कर रहा है। अभी यह डाटा जुटाया जा रहा है कि किस स्कूल में कितने शिक्षक और कितने छात्र रहे। संबंधितों से जवाब तलब किए जाने की भी रूपरेखा बनाई जा रही है।

जिले में शैक्षणिक माहौल को बनाए रखेंगे

जिले में शैक्षणिक माहौल निर्मित हुआ है, उसे इसी प्रकार बनाकर रखा जाएगा। नकल जैसी सोच को किसी प्रकार प्रोत्साहन न मिले, इसके लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे। जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम अच्छा नहीं रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -विशंभर सिंह सिकरवार, जिला शिक्षा अधिकारी

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