भिंड | जिले के ग्राम खेरा में स्थित धरमू बाबा आश्रम में चल रही भागवत कथा में पंडित देवनारायण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह का वर्णन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के जयघोष लगाकर नृत्य किया। छठवें दिन कथा के प्रसंग में शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणि का विवाह एक आदर्श विवाह है। रुक्मणि साक्षात लक्ष्मी हैं और श्रीकृष्ण साक्षात नारायण हैं। उन्होंने कहा कि राजा भीष्मकाय के घर रुक्मणि का जन्म हुआ और बाल्य अवस्था से वह भगवान कृष्ण को चाहने लगी थीं, लेकिन भाई उसका विवाह राजा शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। भाई की इच्छा के खिलाफ रुक्मणि ने ब्राह्मण से कहा कि में कृष्ण से विवाह करना चाहती हूं और एक पत्र के माध्यम से कृष्ण को संदेश पहुंचाया। रुक्मणि श्रीकृष्ण को पाने के लिए प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने मंदिर जाती है। यहां से श्रीकृष्ण ने उन्हें ले गए और विवाह कर लिया।