पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • मति मकड़ी की तरह जाल बिछाती है: विनम्र सागर

मति मकड़ी की तरह जाल बिछाती है: विनम्र सागर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मति मकड़ी की तरह जाल बिछाती जो चारों गति में भ्रमण कराती है, कुमति कुगति में भ्रमण कराती है जो दुखदायी है, यदि दुख को समाप्त करना है तो पाप रूपी कर्म से बचो तो खुद के भ्रमण से छूट सकते हैं। यह बात रविवार को ऋषभ भवन परिसर में सकल जैन समाज द्वारा आयोजित धर्मसभा प्रवचन कार्यक्रम में विनम्र सागर महाराज ने कही।

उन्होंने कहा कि गति को पुण्य पाप से निर्धारित करते है अच्छी गति से पुण्य में वृद्धि होती है, जैसा पाप पुण्य होते है उसके अनुसार ही अच्छी व बुरी गति होती है। अच्छा कर्म पुण्य को बढ़ता है पुण्य से ही सुगति अर्थात मनुष्य व देव गति प्राप्त होती है। जिसने पाप कर्म के कारण दुर्गति अथवा नरक गति व तिर्यंच गति का बंध करता है या दुर्गति का बंध हुआ है वह कभी भी वृति नहीं बन सकता है संयम धारण नहीं कर सकता ये दुर्गति के कारण है। आचार्य श्री ने कहा कि युवा अवस्था में ही धर्म करना चाहिए, युवा अवस्था में संयम धारण करने से सुगति का बंध होता है क्यों कि वह हर समय में धर्म में रहता है कर्तव्यों का पालन करता है और प्रत्येक जीवों के प्रति करूणा व दया भाव रखता है इसलिए उनका अंत बहुत अच्छा होता है देवगति की प्राप्ति कर लेते है। र्स्वगों में सागरों की आयु होती है इसलिए शुभ मरण करने के लिए व अच्छी गति में जाने के लिए पुण्य कार्य करते रहना चाहिए।

धर्म

सकल जैन समाज द्वारा रविवार को ऋषभ भवन परिसर में धर्मसभा का आयोजन हुआ

भक्ति के अनुसार ही मिलता है फल

विनम्र सागरजी ने कहा कि आज वर्तमान में किसी के पास धन थोड़ा है तो किसी के पास अपार संपदा। कोई दो समय की रोटी के लिए तरस रहा है तो कोई रोटियों को व्यर्थ फेंक रहा है। वे अलवर में अपना प्रवचन दे रहे थे।उन्होंने कहा कि ईश्वर लोगों के साथ भेदभाव नहीं करता। यह काम हमारी उमंग का परिणाम है। किसी ने परमात्मा की भक्ति में ज्यादा उमंग और रुचि दिखाई, जिससे आज बहुत कुछ प्रतिफल प्राप्त हुआ। जिसने परमात्मा की भक्ति में उमंग नहीं दिखाई उसे कुछ नहीं मिला। जिसने परमात्मा की भक्ति करने वालों की उमंग में बाधा डाली। वह भूखे मरने की कगार पर जाता है और अकाल मौत का शिकार हो जाता है। उन्होंने कहा कि उमंग की लहर ही हमारी क्रिया शक्ति को ऊर्जावान बनाती है। रुचि ही सब कुछ दिलाने वाली है। उसके बिना कोई भी कार्य करना उचित नहीं है। रुचि ही जीवन को सफल बनाएगी। वहीं भक्तामर स्त्रोत की महिमा को समझ जाओगे तो अपने जीवन को सफल बना लोगे। भक्तामर स्त्रोत का सही उच्चारण करने से ही इसका फल मिलता है। कार्यक्रम में अशोक कुमार जैन मुरार वालों के परिवार को मिला। धर्मसभा में रतनलाल, महेन्द्र कुमार, देवचंद्र, रमेशचन्द्र, चक्रेश कुमार, निर्मलचंद्र जैन, श्रीकृष्ण, सूरसेन जैन (फूप), विनोद, सुभाषचंद्र जैन, संजीव कुमार जैन आदि श्राद्धालु धर्मसभा में उपस्थित रहे।

खबरें और भी हैं...