अटेर विकासखंड का शासकीय प्राथमिक स्कूल बसावन सिंह का पुरा। इसमें कुल 12 बच्चे हैं, जिसमें छह इस साल पास होकर दूसरे स्कूलों में चले जाएंगे। वहीं अब शेष सात बच्चों के लिए विभाग नया भवन बनवा रहा है। जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं है। स्कूल शिक्षक और शाला प्रबंध समिति के पदाधिकारी इसे दूसरे स्कूल में मर्ज किए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन विभाग के ही कुछ अफसर जानबूझकर शासन के पैसों को खर्च कराने के लिए जबरन भवन बनवाने पर अड़े हुए हैं।
बच्चों को दूसरी शाला में मर्ज कराना उचित होगा
यहां बता दें कि अटेर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक स्कूल बसावन सिंह का पुरा में छात्र संख्या बहुत ही कम हैं। वहीं छात्र संख्या कम होने के साथ यहां भवन भी नहीं है। ऐसे में यह स्कूल वर्तमान में गांव में एक निजी कमरे में चल रहा है। लेकिन पिछले वर्ष राज्य शिक्षा केंद्र से इस स्कूल के लिए एक अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत हो गया है। लेकिन जब स्कूल शिक्षक और शाला प्रबंधन समिति के लोगों ने इसका विरोध किया तो डीपीसी संजीव शर्मा ने मार्च में जांच कराई। जांच में सामने आया कि स्कूल में मात्र 10-12 बच्चे हैं। इसमें चार से पांच बच्चे इस साल पास होकर दूसरे स्कूल में चले जाएंगे। वहीं शेष 5-6 बच्चों के लिए भवन बनाया जाना उचित नहीं है। ऐसे में इस स्कूल को पड़ोस की दूसरी शाला में मर्ज किया जाना उचित रहेगा। लेकिन डेढ़ माह बाद ही डीपीसी ने अपने आदेश पर यूटर्न ले लिया है। अब वे फिर से स्कूल के भवन निर्माण को लेकर अड़ गए हैं, जिससे शासन के लाखों रुपए की हानि होने वाली है। जबकि इस संबंध में स्कूल शिक्षक और शाला प्रबंधन समिति के लोग विरोध भी कर रहे हैं।