भिंड | शहर का ऐतिहासिक गौरी सरोवर आज धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। 11वीं सदी में पृथ्वीराज चौहान के द्वारा खुदवाया गया यह सरोवर आज अपना अस्तित्व खोने की कगार में है। गौरी सरोवर के नाम से जाना जाने वाला शहरी क्षेत्र का तालाब आज जहर उगल रहा है। प्रशासनिक उदासीनता और शहरवासियों की लापरवाही का नतीजा इस तालाब को लेकर देखने को मिल रहा है। तालाब के जिन घाटों पर कुछ वर्ष पहले भीड़ लगी रहती थी। आज वहा वीरानी छाई हुई है। जल-जीव के लिए कभी जीवनदायी गौरी तालाब आज हर पल दम तोड़ने को मजबूर है। दूर-दूर तक फैला यह तालाब अब धीरे-धीरे अतिक्रमण का शिकार हो रहा है। लोगों के द्वारा घरों का कचड़ा और गंदगी इसी तालाब में फेंका जाता है जो इस तालाब को भरने का काम भी कर रहा है। जल की जगह इस तालाब में जलकुंभी का कब्जा पूरी तरह से हो गया है। अब इस तालाब की उपयोगिता भी शून्य सी हो गई है।