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मानव जीवन का सार है ज्ञान: विनम्र सागर

3 वर्ष पहले
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शहर के ऋषभ सत्संग भवन में हुआ धर्मसभा का आयोजन

भास्कर संवाददाता | भिंड

मानव जीवन का यदि सार है तो वह ज्ञान है, धन परिवार आदि कुछ भी सार नहीं है। जिनके पास ज्ञान है, वे धन को छोड़ देते हैं, संत बनकर केवल ज्ञान की प्राप्ति करके मोक्ष को प्राप्त किया करते हैं। ज्ञान है तो सब कुछ मिल जाता है। यह वचन शनिवार को शहर के ऋषभ भवन में सकल जैन समाज द्वारा आयोजित धर्मसभा में जैन संत विनम्र सागर महाराज ने कहे।

उन्होंने कहा कि धर्म की अंतिम परिणति सार है। जिसके बाद कुछ भी शेष न हो वह सार है, सर्वोत्तम कार्य को करने से सार नजर आता है, सर्वोत्तम कार्य का अनुकरण करने से सार स्वयं ही मिल जाता है, जैसे ही सार मिल जाता है, वैसे ही कार्य में सफलता मिल जाती है। शास्त्र पढ़ने का मूल ध्येय जिंदगी को पढ़ना है। शास्त्र में जिंदगी का प्ररूपण है शास्त्र में शब्दों का कथन है और साधु शब्दों का प्रायोगिक रूप है। रो-रो कर मरना मृत्यु है और पूरी आयु लेकर मरना सकाल मरण है,अचानक मृत्यु होना अकाल मरण है।

इस मौके पर महेंद्र कुमार, राकेश जैन, रतनलाल, दिनेश कुमार (एडवोकेट) आशीष, ईशांत, मंगल जैन सहित समाज के अन्य लोग विशेष रूप से मौजूद रहे।

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