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इस साल 40 महिलाओं ने किया रक्तदान

3 वर्ष पहले
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अस्पताल में लोगों ने 2122 यूनिट ब्लड किया डोनेट

भास्कर संवाददाता | भिंड

चार साल पहले तक शहर में ब्लड डोनेट करने के लिए महिलाएं आगे आने से डरती थी, लेकिन अब एक साल में 40 महिलाएं जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान करतीं हैं। इनमें करीब 21 महिलाएं वर्ष में दो से तीन बार तक स्वैच्छिक ब्लड डोनेट करतीं हैं। इन सबसे बड़ी बात यह है कि इन महिलाओं में से कुछ महिलाएं शादी की सालगिरह और अपने बच्चों के बर्थडे पर अपने पति के साथ जिला अस्पताल में रक्तदान करती हैं।

गौरतलब है कि चार साल पहले तक जिले में ब्लड डोनर नहीं मिलते थे। इसके कारण गर्भवती महिलाओं, थैलीसिमिया, स्किल सेल, कैंसर और डायलिसिस के मरीजों को ग्वालियर, दिल्ली जाना पड़ता था। इसमें सबसे अधिक परेशानी थैलीसिमिया के पीड़ितों को उठानी पड़ती थी। उन्हें हर सप्ताह, पखवाड़ा या फिर एक माह में ब्लड की चढ़वाने के लिए दूसरे शहर का रूख करना पड़ता था। इसमें गरीबों को खासी परेशानी होती थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं, मरीजों को आसानी से ब्लड उपलब्ध हो रहा है।

चार साल पहले एक भी महिला नहीं करती रक्तदान, अब पतियों के साथ बढ़-चढ़कर ले रहीं हिस्सा

चार हजार से अधिक लोगों ने किया ब्लड डोनेट

चार साल में 4914 लोगों ने ब्लड डोनेट किया। इसमें 40 महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें 21 वे महिलाएं है जो साल में दो से तीन बार ब्लड डोनेट करते हैं। साल 2014 में 683, साल 2015 में 785,साल 2016 में 1320,साल 2017 में 2122 लोगों ने जिला अस्पताल जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान किया। वहीं जनवरी में 18 मई 2018 तक 685 लोग ब्लड डोनेट कर चुके हैं।

यह महिलाएं एक साल में 3 बार कर चुकी हैं रक्तदान

रेखा जैन, नीतेश जैन, मुदिता भारद्वाज, उमा शर्मा, गीता गुप्ता, सुनीता सोनी, तृप्ति कुशवाह, आस्था गुप्ता, किरण जैन, कल्पना सोनी, राजकुमारी जैन, पूनम जैन, प्रिया जैन, निशा अग्रवाल, रीना यादव, गीता चावला, शिखा जैन, नाहिदा, नसीमा बानो, स्वेता सक्सेना, मीरा शर्मा वे महिलाएं हैं जो एक साल में तीन बार जरूरतमंद मरीजाें के लिए ब्लड डोनेट करती हैं।

5 से 6 लोग रोजाना रक्तदान करने के लिए आ रहे हैं

पिछले चार साल में महिलाओं के साथ पुरूष युवा रक्तदाताओं की संख्या भी काफी बढ़ी है। ब्लड बैंक के इंचार्ज महेश बौहरे ने बताया कि बैंक में अभी 5 से 6 लोग रोजाना रक्तदान करने के लिए आ रहे हैं। वहीं जुलाई से अक्टूबर तक यह संख्या दुगनी हो जाती है। इसके अलावा सामाजिक, स्वयंसेवक संगठनों के लोग भी ब्लड डोनेट करने के लिए आते हैं।

जागरूक हुए हैं लोग

सिविल सर्जन डॉ. अजीत मिश्रा ने बताया कि शहर के लोगों में रक्तदान को लेकर जागरूकता आई है। इसमें महिलाएं भी पीछे नहीं है। स्वैच्छिक रक्तदाताओं की सूची लंबी है। उन्हें आधी रात को कॉल करने पर उपलब्ध हो जाते हैं। इसके अलावा शहर के रक्तदान संगठन भी इस कार्य में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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