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जांभाणी हरिकथा में बताए मन व आत्मा शुद्धि के रहस्य

3 वर्ष पहले
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भीनमाल। निकटवर्ती कुकावास स्थित गुरू जंभेश्वर मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय जाभांणी हरिकथा में उपस्थित श्रद्धालु।

भास्कर न्यूज | भीनमाल

निकटवर्ती कुकावास स्थित गुरू जंभेश्वर मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय जाभांणी हरिकथा के छठे दिन शनिवार को कथावाचक स्वामी बलदेवानंद ने कहा कि तन की शुद्धि जल के द्वारा होती है, मन की शुद्धि सत्य के द्वारा व आत्मा की शुद्धि परमात्मा के भजन द्वारा होती है। जिसके सहारे यह शरीर टिका हुआ है उस आत्मा के लिए हमारे मन में विचार नहीं आता, उस जीव का यदि हित चाहते है, भला चाहते है तो सोचना होगा, विचार करना होगा जीवन का लक्ष्य क्या था और मैं किसी दिशा में आगे बढ़ रहा हूं। उन्होंने कहा कि यदि जीवात्मा का भला चाहते है तो इस वेला में उठकर स्नानादि क्रियाओं से निवृत होकर सत्वगुण का अधिक से अधिक लाभ हो उठाना चाहिए। इस मौके पर स्वामी ने वैदिक सनातन परंपरा में गर्भाधान से अंत्येष्टि तक 16 प्रकार के संस्कार हैं। इनमें से वर्तमान में सर्वाधिक संस्कार संपन्नता विश्नोई समाज में देखने को मिलती है। इस अवसर पर चैनपुरा महंत कल्याणदास, कुकावास महंत नारायणदास, जोगाउ महंत श्यामदास महाराज सहित बड़ी संख्या में वाड़ाभाडवी, मेड़ा, थोबाउ, जोगाउ, नयावाड़ा सहित आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में विश्नोई समाज के लोग मौजूद रहे।

मेले व यज्ञ का आयोजन आज

सात दिवसीय जांभाणी हरिकथा के समापन पर विश्नोई समाज के संत महात्माओं के सान्निध्य में यज्ञ का आयोजन होगा। जिसमें विश्नोई समाज के सैकड़ों लोग घी व नारियल की आहुति देंगे। उसके बाद 120 शब्दों से पाहल बनाया जाएगा। इस दौरान दिनभर भी धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

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