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भिवाड़ी सीएचसी : कई बार बुलाने पर आई डॉक्टर, प्रसूता को देखते ही रैफर कर दिया

3 वर्ष पहले
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औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में अस्पताल के नाम पर एक राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है। जहां प्रसव के लिए आने वाली प्रसूताओं को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सीएचसी से प्रसूताओं को अक्सर रैफर का ही टिकट थमाया जाता है। ऐसे में अलवर तक की दौड़ लगाने की बजाए लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। पूर्व में भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं। यही स्थिति सोमवार रात को भी देखने को मिली। जब शाम से भर्ती एक प्रसूता को ऐनवक्त पर रैफर कर दिया गया। दैनिक भास्कर को सोमवार रात करीब साढ़े दस बजे सूचना मिली कि अस्पताल में तीन प्रसूताएं भर्ती हैं। जिनमें से एक को तत्काल चिकित्सक की आवश्यकता है। लेकिन ऑन कॉल ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक बार-बार सूचना देने के बाद भी नहीं आ रही हैं। अस्पताल पहुंचने पर केवल एक जीएनएम व वार्ड बॉय ही ड्यूटी पर मिला। जीएनएम अकेली तीन-तीन प्रसूताओं को संभालने में जुटी थी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार प्रसूता खुशबू की हालत देखकर ऑन कॉल ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को सूचना भी दी गई, लेकिन वो नहीं आई। चिकित्सक को जब मीडिया के अस्पताल पहुंचने की जानकारी मिली तो वह तुरंत लेबर रूम पहुंची। जहां उन्होंने खुशबू की हालत देखकर उसे तुरंत अलवर ले जाने की सलाह दे डाली।

खतरे में डाल रहे जननी की जान

सीएचसी में शाम से भर्ती प्रसूता की हालत देखकर यदि उसके परिजनों को समय से उसे बाहर ले जाने की सलाह दी जाती तो उन्हें अन्यत्र ले जाने में आसानी रहती, लेकिन ऐनवक्त पर रात करीब पौने बारह बजे प्रसूता को अलवर ले जाने की बात सुनकर प्रसूता के साथ आई उसकी मां के हाथ पांव फूल गए। इस पर उसने अस्पताल में मौजूद लोगों व एक पड़ोसी के सहयोग प्रसूता को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां करीब पौने घंटे बाद ही सुरक्षित प्रसव हो गया।

सोमवार रात 11.44 बजे फर्श पर लैटी प्रसूता को संभालते परिजन।

रात में नहीं रहती कोई एंबुलेंस

रात में अस्पताल परिसर में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए या प्रसूताओं के लिए कोई एम्बुलेंस नहीं है। यहां जो एम्बुलेंस है उस पर वर्ष 2012 से चालक नहीं है। 108 को कॉल कर एम्बुलेंस बुलानी पड़ती है।

सुबह भी टरकाई एक प्रसूता

जिस निजी अस्पताल में खुशबू का प्रसव हुआ वहां एक और प्रसूता करीना निवासी भिवाड़ी को भी भर्ती कराया हुआ था। प्रसूता की मां दौलत देवी ने बताया कि इसे भिवाड़ी सीएचसी में सोमवार सुबह भर्ती कराया था। शाम को प्रसूता की हालत ठीक नहीें होने की बात कहकर उसे तुरंत अलवर ले जाने के लिए बोला गया। लेकिन उन्होंने निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। जहां सामान्य प्रसव हुआ।

पहले भी सामने आए थे मामले

ज्ञातव्य है कि फरवरी माह में भी एक प्रसूता को दिनभर अस्पताल में भर्ती रखने और रात में टरकाने का मामला सामने आया था। जिसको लेकर भास्कर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। जिसे पढऩे के बाद एक और पीडि़त परिवार सामने आया था। जिनको भी अस्पताल में तैनात स्टाफ ने इसी तरह बहाने बनाकर अलवर के लिए रैफर कर दिया था। इस मामले में भी दोषियों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही सीएचसी की व्यवस्थाओं में सुधार।

तीस का आंकड़ा नहीं कर पाए पार

भिवाड़ी सीएचसी पर बेहद कम प्रसव के मामले को लेकर पूर्व में भी विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है। पिछले तीन माह के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो सीएचसी पर जनवरी में 20, फरवरी में 28 व मार्च में 29 प्रसव ही हुए। भिवाड़ी में बड़ी संख्या में मजदूर तबका निवास करता है लेकिन फिर भी उसे सीएचसी में प्रसव कराने में पसीने आ जाते हैं।

केस की स्थिति को देखकर ही स्टाफ प्रसूता को रैफर करता है। यदि इस तरह की लापरवाही है तो जांच कराई जाएगी। हम लोगों को अधिक से अधिक सेवा दे सकें हमेशा यही प्रयास रहता है। डॉ. नीलम, प्रभारी, सीएचसी भिवाड़ी।

प्रसव को लेकर भिवाड़ी सीएचसी का मामला पूर्व में भी ध्यान में आया था। यदि इस तरह की लापरवाही है तो मामले की जांच करा, नियमानुसार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. मनोज यादव, ब्लॉक मुख्य चिकित्साधिकारी तिजारा

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