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बृजमोहन मित्तल 10 साल बाद तीसरी बार बने बीएमए अध्यक्ष, 78 वोट से हारे सतेंद्र चौहान
भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (बीएमए) के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में बृजमोहन मित्तल तीसरी बार अध्यक्ष चुन लिए गए। मित्तल ने सीधे मुकाबले में प्रतिद्वंदी सतेंद्र सिंह चौहान को 78 वोट से हराया। उनका कार्यकाल 2019-21 तक रहेगा। वे 18वें अध्यक्ष होंगे। इससे पहले मित्तल 1998-99 तथा 2005-07 के सत्र में भी बीएमए के अध्यक्ष रह चुके हैं। दिन भर चले मतदान में बीएमए के कुल 344 सदस्यों में 303 ने वोट डाले। मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के करीब एक घंटे बाद शाम पांच बजे परिणाम घोषित कर दिया गया। इसमें बृजमोहन मित्तल को 190 और सतेंद्र सिंह चौहान को 112 मत मिले। बहुराष्ट्रीय इकाइयों के विदेशी प्रतिनिधियों ने भी मतदान किया। सवा पांच बजे परिणाम घोषित कर दिया। मतदान के दौरान पुलिस की व्यवस्था भी रही। पुलिस उपाधीक्षक नेमीचंद खुद मौके पर तैनात रहे।
1982 में बना था बीएमए : बीएमए का गठन वर्ष 1982 में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य उद्यमियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाकर उनका समाधान कराना है। अमरजीत सिंह बक्शी प्रथम अध्यक्ष रहे। अब से पहले वर्ष 2001 में बीएमए अध्यक्ष के चुनाव के दौरान मतदान कराना पड़ा था। बाद के सत्रों में मनोनीत अध्यक्ष बनते गए। गत वर्ष अगस्त में सत्र 2019-21 के लिए प्रवीण लांबा को बीएमए का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। थोड़े ही दिनों के बाद उनके मनोनयन का विरोध हो गया। बीएमए के 156 सदस्यों ने विरोध पत्र सौंपे तो एजीएम ने विरोध को मान्यता देते हुए निरस्तीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी। एथिक कमेटी बनाई गई। एग्जीक्यूटिव कमेटी को मान्यता दी गई। इसके बाद ईजीएम ने लांबा के मनोनयन को रद्द घोषित कर चुनाव कराने के लिए कमेटी बना दी।
भिवाड़ी. अपने समर्थकों के साथ बृजमोहन मित्तल।
लगे बाबा मोहनराम के जयकारे
बृजमोहन मित्तल की जीत की घोषणा के बाद उनके समर्थकों में बाबा मोहनराम के जयकारे गूंज उठे। मित्तल का समर्थकों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। परिणाम घोषणा के बाद शुक्रवार के लिए बीएमए सदस्यों के कार्यालय में आने पर रोक लगा दी। इससे पूर्व मतदान प्रक्रिया के दौरान दोनों ही दावेदारों की ओर से बीएमए कार्यालय के दोनों ओर अपनी-अपनी ओर से टैंट लगाए। मतदाताओं के पहचान पत्र देखकर ही उन्हें वोट डालने की इजाजत दी गई। चुनाव अिधकारी अिनल अग्रवाल ने बताया कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। सभी ने मतदान में भरपूर सहयोग किया।
यह मेरी नहीं सभी साथियों की जीत है। सभी को साथ लेकर चलेंगे। हमारा प्रयास बीएमए को आगे बढ़ाना है। -बृजमोहन मित्तल, नवनिर्वाचित अध्यक्ष, बीएमए
राजनेता भी चुनाव में सक्रिय नजर आए
भिवाड़ी| बीएमए का चुनाव हालांकि उद्योग संगठनों से जुड़ा है, लेकिन इससे भिवाड़ी की राजनीति भी अछूती नहीं रही। शुक्रवार को मतदान प्रक्रिया के दौरान दिनभर भिवाड़ी से स्थानीय जनप्रतिनिधी भी मतदान केंद्र के बाहर टोह लेते रहे। नगर परिषद चेयरमैन संदीप दायमा, उपसभापति बलजीत दायमा, पार्षद उदयनारायण तिवाड़ी एवं वीरेंद्र तिवाड़ी तंवर भी मौके पर बने रहे। बीएमए के मतदान के दौरान बीएमए से अलग होकर अलग संगठन बीसीसीआई बनाने वाले रामनारायण चौधरी पहुंचे। वह पूरी मतदान प्रक्रिया के दौरान मतदान केंद्र के बाहर उद्योगपतियों से मिलते रहे।
बीएमए चुनाव में ग्रामीणों की भी रही रूिच
क्योंकि... बीएमए की बदौलत
भिवाड़ी| बीएमए का चुनाव उद्योगपतियों के बीच था लेकिन मतदान केंद्र के बाहर जमा सैंकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी कुछ और ही कहानी कह रही थी। उनका कहना था कि भिवाड़ी के औद्योगिक विकास का आज जो स्वरूप नजर आता है उसमें बड़ा रोल बीएमए का रहा। एक समय था जब भिवाड़ी छोटा सा गांव था। तब जिन लोगों के पास बमुश्किल बैलगाड़ी हुआ करती थी वे उद्योगनगरी की बदौलत आज फैक्ट्रियों के मालिक हैं। भिवाड़ी औद्योगिक नगरी 1976 में शुरू हुई। धीरे-धीरे यहां फैक्ट्रियां आकर लगने लगी। इससे इसके आसपास के भिवाड़ी, सांथलका, आलमपुर, मिलकपुर, शहदपुर और नंगलियां के ग्रामीणों की किस्मत भी खुली। ग्रामीण धीरे-धीरे कर किसी तरह इन औद्योगिक इकाइयों से जुड़े। किसी ने यहां नौकरी की तो किसी ने अपने वाहन इसमें लगाए। इस तरह ये कंपनियां हर किसी के रोजगार का सहारा बनी। बाद में इनमें से कई लोगों ने इकाइयां ही यहीं पर लगा ली। स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक संबल दिया और आज भी वे क्षेत्र के विकास में योगदान दे रहे हैं। दैनिक भास्कर के साथ ऐसे कई लोगों ने बात की।
मेरे पिताजी भिवाड़ी गांव आए थे। मैंने शुरू में बैलगाड़ी चलाई। बाद में इन इकाइयों से जुड़ा। आज मेरी तार बनाने की एक फैक्ट्री है। इसमें 90 से 100 लाेग काम करते हैं। बहुत खुशी होती है अपने लोगों के लिए कुछ किया। -मंगलसिंह, भिवाड़ी
शुरुआत में भिवाड़ी में आकर परचून की दुकान खोली। यहीं से कमाया। आज मेरी दो कंपनियां हैं। इनमें 70 से 80 लोग काम करते हैं। उद्योगपतियों के संपर्क मंे आकर बहुत कुछ सीखा। आज अपनों के लिए कुछ कर सकता हूं। -राजपाल विदूड़ी, सांथलका
मैं पलवल से यहां आया। शुरुआत में भिवाड़ी में प्रिंटिंग का काम किया। आज दो कंपनियां हैं। लेकिन आज भी गांव का मोह नहीं छोड़ा। बीएमए संगठन आज हम सभी की मदद करता हैं। इसीलिए इससे जुड़े हंै। -धर्मवीर देशवाल, उद्योगपति
जीआरपी में नौकरी की। बाद में नौकरी छोड़कर यहां काम शुरू किया। भिवाड़ी ने हमें बहुत कुछ दिया। आज एक कंपनी है। इसमें लोगांे को रोजगार दिया है। जसवीर सिंह, उद्योगपति
जो बैलगाड़ी चलाते थे आज फैक्ट्रियांे को संभाल रहे हैं