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बीडा ने 15 सोसायटियों को दिए थे नोटिस, अवधि खत्म, एक ने ही दिया जवाब

3 वर्ष पहले
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बीडा की ओर से एसटीपी को लेकर अंतिम नोटिस देने के बाद 15 में से महज एक ही सोसायटी ने जवाब दाखिल किया है। अन्य सोसायटीज ने जवाब देने में रुचि ही नहीं दिखाई, इसलिए अब बीडा ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। सोमवार से इन सोसायटीज की जांच कर इन पर ताले लटकेंगे। सोसायटीज में रहने वाले करीब 5000 लोग कार्रवाई से प्रभावित होंगे। भिवाड़ी में पहली बार इस तरह की कार्रवाई होगी। दरअसल किसी भी सोसायटी को बीडा की ओर से कंपलीशन सर्टिफिकेट (सीसी) जारी करने से पहले उसके एसटीपी की जांच की जाती है। सोसायटी संचालक इसे बनवा तो लेते हैं लेकिन चालू नहीं करते। उनका तर्क होता है कि किसी भी एसटीपी को चालू करने से पूर्व वहां कुल केपिसिटी के कम से कम एक तिहाई लोग रहें। इसकी के बाद यह एसटीपी ठीक ढंग से काम कर पाता है। तब तक कई सोसायटियां टैंकरों या अन्य चीज से इस प्रदूषित जल को अन्य एसटीपी तक पहुंचाती हैं। 22 दिसंबर को विधानसभा की जनलेखा समिति भिवाड़ी में सीईटीपी का निरीक्षण करने आई थी। उस समय उन्होंने सोसायटियों में लगे एसटीपी की जांच के भी निर्देश दिए थे। बीडा (तत्कालीन यूआईटी) की ओर से एक कमेटी का गठन कर चार जनवरी से इन सोसायटीज में लगे एसटीपी की जांच की। कमी वाली सोसायटी को नोटिस भी दिए गए। इसके बाद पिछले दिनों ही बीडा ने एक अंतिम नोटिस जारी किए गए। जिसमें 15 दिन में एसटीपी ठीक नहीं कराने वाली सोसायटीज को बंद करने की चेतावनी दी थी।

दूषित पानी पर जवाब नहीं देने वाली 14 सोसायटियों पर आज लग सकते हैं ताले

हमने टीम का गठन कर लिया है। सोमवार से सभी सोसायटीज के एसटीपी की जांच की जाएगी। पहले उन सोसायटीज की जांच की जाएगी जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। अब अगर गड़बड़ मिली तो इन सोसायटीज का रजिस्ट्रेशन रद्द कर देंगे। सोसायटीज में रहने वाले भी इस बात का ध्यान रखें कि उनकी सोसायटी का एसटीपी चल रहा है या नहीं। इसके सही काम नहीं करने पर इन्हें ही परेशानी होगी। - मगनलाल योगी, सीईओ, बीडा

इसीलिए जरूरी है एसटीपी

घरों से निकले गंदे पानी को साफ कर पुन: इस्तेमाल करने के लिए एसटीपी जरूरी है। भिवाड़ी में अमृत योजना के तहत पांच एसटीपी बन रहे हैं। सोसायटियों को भी एसटीपी लगाने थे। इन्हें बीडा से कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र देना था। इस पानी का उपयोग टॉयलेट या प्लांटेशन में किया जाता है। नियमानुसार हर सोसायटी को एसटीपी के पानी का ही रीयूज करना होता है।

भिवाड़ी. एक साेसायटी में लगा एसटीपी। (फाइल फोटो)

बीडा ने इन कंपनियों को दिया नोटिस

बीडा ने एवलोन रेजिडेंसी, रिनायसेंस बिल्डहोम प्रा.लि., सनसिस्टम इंस्टीट्यूट ऑफ इंफोर्मेेशन एंड टेक्नोलॉजी प्रा.लि., कालका डवलपर्स प्रा.लि., ओमेक्स हुसिंगपुर, एएंडआर बिल्डमार्ट प्रा.लि, अपनाघर बिल्डवैल प्रा.लि, एवलोन रंगोली, एवलोन होम, पीयूष कॉलोनाईजर्स लि., एमटेक, एमवीएल लि., ओमेक्स खिजूरीवास एवं स्टार रायसन लैंडमार्क्स को नोटिस दिया है।

यह थी रिपोर्ट

यूं तो 15 सोसायटीज के एसटीपी में छोड़ी-बड़ी मिलाकर शिकायतें मिली थी। इनमें एसटीपी के सही काम नहीं करने से लेकर एसटीपी का पानी खुले में बाहर छोड़ने तक शामिल थी। लेकिन कुछ सोसायटीज ऐसी थी, जिनमें बड़ी शिकायतें सामने आईं। (बीडा की जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार)।

1. मैसर्स स्टार रेजन (खिजूरीवास) : परिशोधित जल परियोजना क्षेत्र में खाली भूखंड में जमा कर आवश्यकतानुसार ले जाया जा रहा है।

2. मैसर्स लावण्या बिल्डर्स (ओमेक्स) : 35 केएलडी का अस्थायी प्लांट लगा, लेकिन उपयोग नहीं हो रहा। गंदा पानी सेप्टिक टैंकर से बाहर ले जाकर सिंचाई विभाग के नाले में डाला जा रहा है।

3. मैसर्स एमवीएल (सैदपुर) : एसटीपी संचालित नहीं है। गंदा पानी ऐडीमेंटेशन टैंक में जमा करते हैं। शेष गंदा पानी खाली भूखंड में छोड रहे हैं।

4. मैसर्स एमटेक (खिजूरीवास) : खाली भूमि में गंदा पानी भरा है। शेष सेप्टिक टैंक से बाहर छोड़ते हैं।

5. मैसर्स स्काई व्यू, वसुंधरा नगर (भिवाड़ी) : परिशोधन के बाद पानी उपयोग में लिया जा रहा है। कुछ अतिरिक्त पानी बाहर छोड़ा जा रहा है।

6. मैसर्स आरएसजी बिल्डर्स प्रा.लि.भगतसिंह कॉलोनी : गंदा पानी निकटतम बरसाती नाले में छोड़ा जा रहा है।

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