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बीएमए पूरी करता है छोटे उद्योगों को संरक्षण की जरुरत

3 वर्ष पहले
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बीएमए (भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन) भिवाड़ी के उद्यमियों का समूह है। इसका गठन वर्ष 1982 में उद्यमियों के हितों की रक्षा के लिए किया गया था। पूर्व में इसके मतदान से चुनाव होते थे। इनका कार्यकाल दो वर्ष का होता है। एक पदाधिकारी लगातार दो बार उस पद पर रह सकता है। हालांकि बाद में इस पर मनोनयन शुरू हुआ। फिर बीच में कुछ समय के लिए मतदान हुए। सबसे खास बात यह है कि इसके चुनाव दाे साल पहले ही हाे जाते हैं। जिससे दाे साल तक अध्यक्ष बीएमए का कामकाज संभाल ले। अभी हाल में बीएमए के सत्र 2019-21 के लिए चुने गए अध्यक्ष पद के लिए मतदान हुअा। जिस लेकर काफी गहमा-गहमी रही। वर्तमान में इसके अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चाैहान हैं। जाे चार माह से इसका कामकाज संभाल रहे हैं। दैनिक भास्कर ने बीएमए के कामकाज अाैर भावी याेजनाअाें काे लेकर चाैहान से बातचीत की।

सुरेंद्र सिंह चौहान

भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चाैहान ने भास्कर से बातचीत में कहा

प्रश्न : बीएमए की चुनाव प्रक्रिया के दौरान आप नाेमिनेशन कमेटी में थे। ऐसे में पूर्व में निर्वाचित प्रवीण लांबा का निर्वाचन रद्द कैसे हुआ।

उत्तर : यह सही है कि मैं उस नोमिनेशन कमेटी में था। लेकिन उस समय मुझे प्रवीण लांबा का स्टेटस मालूम नहीं था। बाद में उसकी जानकारी मिली। बीएमए के संविधान में लिखा है कि अगर निर्वाचित अध्यक्ष का एक तिहाई सदस्य विरोध करते हैं तो उसका निर्वाचन रद्द माना जाता है। प्रवीण लांबा के विरोध में बीएमए के 156 सदस्यों ने लिखित में विरोध जताया था। इसके बाद उनका निर्वाचन रद्द कर चुनाव कराने का निर्णय किया गया।

प्रश्न : बीएमए से अब बड़े उद्योग किनारा कर रहे हैं। बीएमए बड़े उद्योगों को नहीं जोड़ पा रहा है। ऐसे में लगता है कि बीएमए केवल छोटी इकाइयों के लिए ही रह गया है ?

उत्तर : बीएमए से बड़े उद्योग किनारा नहीं कर रहे हैं। बीएमए से उनके सेल्फ इंटरेस्ट नहीं होते। छोटे उद्योगों को सुरक्षा चाहिए। इसीलिए वह अधिक यहां से जुड़ते हैं।

प्रश्न: अाखिर ऐसा क्या हुआ कि 17 साल के बाद मतदान कराने पड़े ?

उत्तर : एक मैंबर का नोमिनेशन रद्द हो गया था। वहीं बीएमए में दलगत राजनीति हावी हो रही थी। सभी लोग अपने-अपने लोगांे को अध्यक्ष बनाने में लगे थे। इसी के बाद मतदान कराने का निर्णय किया गया।

प्रश्न : पहले आप बीएमए के संरक्षक थे। फिर आप अध्यक्ष क्यों बनें ?

उत्तर : उस समय मुझ पर अध्यक्ष बनने का काफी दबाव था। मुझे राजनीति नहीं आती। लेकिन लोगों के दबाव में मुझे झुकना पड़ा। इसलिए सर्वसम्मति से मेरा मनोनयन किया गया।

प्रश्न : बीएमए पर आरोप लगते रहे हैं कि यहां पूर्व अध्यक्षों का सम्मान नहीं होता। आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे ?

उत्तर : ऐसा नहीं है। हम पूर्व अध्यक्षों का पूरा सम्मान करते हैं। उन्हें हर मीटिंग में बुलाया जाता है। पूर्व अध्यक्ष हमारी हाईलेवल कमेटी के सदस्य होते हैं। हम नियमों को फोलो करते हैं।

प्रश्न : बीएमए को लेकर आप क्या सोचते हैं, जबकि आज यह धड़ों में बंट रहा है?

उत्तर : धड़ों वाली बात नहीं है। चुनाव एक प्रक्रिया का हिस्सा है। बीएमए का गठन व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए किया गया। हमारा प्रयास सभी को साथ लेकर चलना है। हम उसी दिशा में बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रश्न : बीएमए काे किन मुद्दाें के साथ अाप बढ़ाना चाहते हैं?

उत्तर : हमारे मुद्दे प्रदूषण, बिजली, जीराे डिस्चार्ज, ब्राडबैंड लाइन अादि हैं। इसके अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना भी हमारी ड्यूटी है। इसके लिए हम प्रयास करेंगे।

प्रश्न : सीटीपीटी और बीएमए एक हैं या अलग? जबकि दोनों का ही उद्देश्य उद्योग हित है?

उत्तर : देखिए इस बात काे तो दस्तावेज देखकर ही बताया जा सकता है। सीटीपीटी को चलाने वाले भी बीएमए के सदस्य ही हैं।

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