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सबसे बड़ी सोसायटी, सुविधाएं भी हैं सिर्फ सामुदायिक केंद्र की जरूरत

3 वर्ष पहले
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अलवर रोड स्थित आशियाना आंगन शहर की सबसे बड़ी सोसायटी है। 1200 परिवार वाली इस सोसायटी में करीब 6500 लोग रहते हैं। सोसायटी में यूं तो आधुनिक सुख-सुविधाएं सहित जरूरत की सभी चीजें उपलब्ध हैं, लेकिन सामुदायिक केंद्र की कमी यहां रहने वालों को सबसे ज्यादा खलती है। जिस लेकर कई बार मांग की जा चुकी है। लेकिन इसका समाधान नहीं हुआ है।

सोसायटी में दो पार्क बनें हैं। जिनमें बच्चे खेलते हैं। इसके अतिरिक्त वहां जिम, क्लब, स्वीमिंगपूल, बैडमिंटन रूप, क्रिकेट नेट, टेबल टेनिस एवं वालीबॉल के लिए कोर्ट हैं। यहां सुबह एवं शाम बच्चे खेलते हैं। सोसायटी में ही एक जगह पुस्तकालय भी बना है। जिसमें बच्चे किताबें पढ़ते हैं। यहीं पर दुर्गा मां का भी मंदिर है। जिसमें समय-समय पर धार्मिक आयोजन होते हैं। सोसायटी में लगाए गए फूलों के पौधे यहां खुशबू बिखेरते हैं। सोसायटी के लोगों की सुरक्षा के लिए सुबह 19 एवं शाम को 18 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इसी के साथ 90 कैमरों से सोसाइटी के चप्पे -चप्पे की निगरानी रखी जाती है।

औद्योगिक क्षेत्र में आशियाना आंगन सोसाइटी का कोई मुकाबला नहीं है। यहां सभी धर्म के लोग के साथ रहते व सभी त्योहार मनाते हैं। सोसाइटी के बच्चों ने स्पोर्ट्स में भिवाड़ी का नाम स्टेट व नेशनल लेवल पर चमकाया है। सोसाइटी में कुछ कमियां है जिनके बारे में संबंधित अधिकारियों को बताया गया है। अनिल वाधवा, वाईस प्रेसीडेंट, आशियाना आंगन सोसाइटी।

सोसाइटी में सामुदायिक केंद्र नहीं होने पर एक हॉल दिया गया है। अगर सोसाइटी के निवासियों को सामुदायिक केंद्र का निर्माण करवाना है तो उन्हें पहले सरकार से इसकी मंजूरी लेनी होगी। इसकी के बाद निर्माण शुरू होगा। सोसाइटी में रोड व मेंटिनेंस का काम मंगलवार से चलाया जाएगा। जेपी ठाकुर, असिस्टेंट मैनेजर, आशियाना आंगन।

िबलियर्ड्स खेलते आशियाना आंगन सोसायटी उपाध्यक्ष अनिल वधवा।

यह है समस्या

सोसायटी में सामुदायिक केंद्र की तो कमी है ही। इसके लिए कई बार स्थानीय लोगाें ने बिल्डर से शिकायत की। लेकिन समाधान नहीं हुआ। सोसायटी में रोड खराब है। बारिश के दिनों में यहां पानी एकत्रित हो जाता है। एसटीपी में भी खामियां हैं। वहीं बिल्डिंग के पिलर भी क्षतिग्रस्त हैं।

महिलाओं के लिए होते विशेष कार्यक्रम

सोसाइटी में बच्चों के साथ-साथ महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। आरडब्ल्यूए द्वारा चलाए जाने वाले “सुपर मोम’ कार्यक्रम के तहत महिलाओं को ब्यूटी, कुकिंग, योगा, डांस, आर्ट व अन्य सोशल एक्टिविटी कराई जाती है। जिससे सभी महिलाएं बढ़ चढ़कर भाग लेती है। आरडब्ल्यूए की सदस्य बबीता ने बताया कि सुपर मोम कार्यक्रम में दस महिलाओं का होना जरूरी है। यह कार्यक्रम एक माह में दो बार आयोजित किया जाता है।

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